कृषि और संगठन विस्तार पर हुआ मंथन
रिपोर्ट:आलोक सूर्यवंशी
सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत के तत्वावधान में जिला छिंदवाड़ा का एकदिवसीय अभ्यास वर्ग सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस वर्ग में जिले भर से आए प्रमुख दायित्ववान कार्यकर्ताओं और किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान संगठन की मजबूती, कार्यप्रणाली और आगामी कार्ययोजना को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में मुख्य रूप से भारतीय किसान संघ की स्थापना के उद्देश्यों, इसकी रीति-नीति और कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने संगठन के विस्तार को रेखांकित करते हुए ग्राम स्तर तक इकाईयों को सशक्त बनाने पर बल दिया।
वर्ग के दौरान प्रमुख रूप से तीन आधारभूत विषयों पर गहन मंथन हुआ:
- संगठनात्मक विषय: संगठन को बूथ और ग्राम स्तर तक ले जाने, सदस्यता अभियान को गति देने तथा कार्यकर्ताओं के दायित्व बोध पर चर्चा की गई।
- रचनात्मक विषय: किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने जैसे रचनात्मक कार्यों की रूपरेखा तय की गई।
- आंदोलनात्मक विषय: किसानों की स्थानीय एवं नीतिगत समस्याओं—जैसे उपज का लाभकारी मूल्य, खाद-बीज की सुलभ उपलब्धता, सिंचाई और बिजली की समस्याओं को लेकर आवश्यकता पड़ने पर चरणबद्ध आंदोलनात्मक कदम उठाने पर रणनीति बनाई गई।
- इस वर्ग का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, किसानों की जमीनी समस्याओं के समाधान की रणनीति बनाना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना रहा।
- कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और बलराम जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। दिनभर चले इस अभ्यास वर्ग को विभिन्न वैचारिक और संगठनात्मक सत्रों में विभाजित किया गया था।
- प्रमुख सत्र और विचार-विमर्श
- संगठन विस्तार एवं कार्यप्रणाली: प्रथम सत्र में संगठन को ग्राम स्तर तक सक्रिय करने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि हर गांव में किसान इकाई का गठन कर किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना संगठन की प्राथमिकता है।
- लागत आधारित लाभकारी मूल्य: आर्थिक सत्र में किसानों को फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य (C2+50%) दिलाने की मांग पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि जब तक खेती को लाभ का व्यवसाय नहीं बनाया जाएगा, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो सकती।
- प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण: पर्यावरण एवं तकनीकी सत्र में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई गई। किसानों को पारंपरिक, गो-आधारित और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही खेतों में जल संचयन और उन्नत सिंचाई पद्धतियों के उपयोग पर मार्गदर्शन दिया गया।
- स्थानीय समस्याएं और समाधान: अंतिम सत्र में स्थानीय स्तर पर खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति, फसल बीमा और मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर रणनीति तय की गई।
वर्ग के समापन अवसर पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनका स्वावलंबन ही देश की वास्तविक तरक्की का आधार है। अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने संगठन के विस्तार और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और संगठन मंत्र के साथ हुआ।
कार्यक्रम के समापन सत्र में सभी कार्यकर्ताओं ने संगठन के सिद्धांतों पर चलते हुए किसान हित में निष्ठापूर्वक कार्य करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रांत एवं जिला स्तर के प्रमुख पदाधिकारी, खंड स्तरीय कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।















