चीनी मिलों का रेट करीब ₹55 प्रति किलो वहीं थोक भाव 69₹ से घटकर 58–62 रूपये किलो तक सिमटा
सतपुड़ा एक्सप्रेस | विशेष रिपोर्ट — आलोक सूर्यवंशी
सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा:चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार की नीतियों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। कुछ समय पहले थोक बाजार में चीनी का भाव करीब ₹69 प्रति किलो तक पहुंच गया था, जो अब घटकर लगभग ₹58–62 प्रति किलो के स्तर पर आ गया है। वहीं बाजार में चीनी मिलों का रेट करीब ₹55 प्रति किलो बताया जा रहा है। इससे कीमतों में तेजी के दौर के मुकाबले स्पष्ट नरमी दिखाई दे रही है।
मिल रेट करीब ₹55, थोक बाजार ₹60–62
बाजार में मौजूदा स्थिति को देखें तो चीनी मिलों से निकलने वाला भाव लगभग ₹55 प्रति किलो के आसपास बताया जा रहा है, जबकि थोक बाजार में चीनी वर्तमान में ₹58–62 प्रति किलो के दायरे में कारोबार कर रही है वहीं खुदरा दुकान में 65 रुपए किलो के आस पास भाव चल रहा है पहले थोक भाव ₹69 तक पहुंच गया जाने से कारोबारियों और उपभोक्ताओं दोनों पर दबाव बढ़ गया था।मिल रेट और थोक रेट के बीच अंतर में परिवहन, पैकिंग, कमीशन और अन्य व्यापारिक खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए मिल भाव में नरमी का असर धीरे-धीरे थोक और फिर खुदरा बाजार तक पहुंच सकता है।
आयात नीति से आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और त्योहारी सीजन में कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना है।इसके अलावा पहले से आयातित चीनी को घरेलू बाजार में उपलब्ध कराने के फैसले से भी बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है।
जमाखोरी पर सरकार की नजर
कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा को 15 दिन की जरूरत तक सीमित किया है। इसका उद्देश्य जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने और जमाखोरी पर रोक लगाना है। चीनी मिलों से बिक्री संबंधी जानकारी लिए जाने से बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने वालों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
₹69 से ₹58–62 तक गिरावट बनी राहत का संकेत
थोक बाजार में ₹69 से घटकर ₹60–62 प्रति किलो तक आना चीनी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। वहीं मिल रेट करीब ₹55 प्रति किलो रहने से संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतों का दबाव कुछ कम हुआ है।सरकार के आयात संबंधी फैसले, स्टॉक नियंत्रण और बाजार में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराने की नीति से तेजी पर अंकुश लगाने में मदद मिल रही है। हालांकि खुदरा बाजार में इसका पूरा लाभ पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।
किसानों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन जरूरी
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करते समय सरकार के सामने गन्ना किसानों, चीनी मिलों और उपभोक्ताओं के हितों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। बहुत अधिक कीमत से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ता है, जबकि अत्यधिक गिरावट से चीनी मिलों और गन्ना किसानों पर दबाव पड़ सकता है। इसी के साथ एथेनॉल की नीति की समीक्षा भी जरूरी है
विशेष रिपोर्ट का निष्कर्ष
चीनी बाजार में थोक भाव ₹69 से घटकर ₹58–62 प्रति किलो जबकि चीनी मिलों का रेट करीब ₹55 प्रति किलो रहना फिलहाल बाजार में सुधार और तेजी कमजोर पड़ने का संकेत है। सरकार की आयात नीति, स्टॉक नियंत्रण और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों का असर दिखाई देने लगा है।अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में थोक बाजार की यह नरमी खुदरा बाजार और आम उपभोक्ता तक कितनी तेजी से पहुंचती है।
सतपुड़ा एक्सप्रेस विशेष रिपोर्ट — आलोक सूर्यवंशी 8817448817















