विधेयक का नाम “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026” दर्ज
सतपुड़ा एक्सप्रेस विशेष रिपोर्ट | आलोक सूर्यवंशी
भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा संवैधानिक कदम उठाया गया है। विधानसभा से पारित मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 26 अगस्त 2026 को मंजूरी दे दी है। अब विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाना है। राष्ट्रपति की मंजूरी और इसके बाद राज्य सरकार द्वारा नियम अधिसूचित किए जाने के बाद ही कानून के प्रावधान प्रभावी होंगे।
21 जुलाई को विधानसभा ने पारित किया था विधेयक
मध्यप्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को मानसून सत्र के दौरान UCC विधेयक पारित किया था। विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच विधेयक बहुमत से पारित हुआ। विधानसभा की आधिकारिक कार्यवाही में विधेयक का नाम “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026” दर्ज है।
संविधान का अनुच्छेद 44 बना आधार
समान नागरिक संहिता का संवैधानिक आधार मुख्य रूप से अनुच्छेद 44 में है। संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में कहा गया है कि राज्य भारत के समस्त क्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार ने भी अनुच्छेद 44 के साथ अनुच्छेद 14 यानी कानून के समक्ष समानता और समान संरक्षण को UCC के प्रमुख संवैधानिक आधारों में बताया।
अनुच्छेद 14, 15 और 21 का क्या संबंध?
अनुच्छेद 14 सभी व्यक्तियों को कानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है। UCC के समर्थकों का तर्क है कि विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लैंगिक और नागरिक समानता को मजबूत कर सकती है।
अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है। वहीं अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से जुड़ा है। हालांकि UCC के किसी भी प्रावधान की संवैधानिक वैधता अंततः न्यायिक समीक्षा के अधीन रह सकती है।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद भी कानून अभी लागू नहीं
यह सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक स्थिति है। राज्यपाल की मंजूरी मिलना और कानून का प्रभावी हो जाना एक ही बात नहीं है।
संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल किसी विधेयक पर स्वीकृति दे सकते हैं या कुछ परिस्थितियों में उसे राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकते हैं। अनुच्छेद 201 के अनुसार राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित विधेयक पर राष्ट्रपति स्वीकृति दे सकते हैं या स्वीकृति रोक सकते हैं।
मध्यप्रदेश UCC विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया इसलिए अगला महत्वपूर्ण संवैधानिक पड़ाव है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद राज्य सरकार कानून के नियमों को अधिसूचित करेगी।
UCC में किन विषयों पर जोर?
विधेयक के प्रमुख विषयों में विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित समान नागरिक व्यवस्था शामिल है। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने तथा लिव-इन संबंधों के पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। बहुविवाह पर रोक और महिलाओं तथा पुरुषों के लिए समान उत्तराधिकार व्यवस्था भी इसके प्रमुख प्रावधानों में बताई गई है। आदिवासी समुदायों को विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है।
संवैधानिक बहस भी होगी महत्वपूर्ण
UCC को लेकर संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 और 44 के बीच संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा। जहां अनुच्छेद 14 समानता की बात करता है और अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता की दिशा में राज्य को प्रयास करने का निर्देश देता है, वहीं अनुच्छेद 25 और 26 धार्मिक स्वतंत्रता तथा धार्मिक मामलों के प्रबंधन से जुड़े अधिकारों की रक्षा करते हैं।
इसलिए मध्यप्रदेश में UCC लागू होने की प्रक्रिया केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक और कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है।
निष्कर्ष: राज्यपाल की मंजूरी के साथ मध्यप्रदेश UCC की प्रक्रिया एक चरण आगे बढ़ गई है, लेकिन राष्ट्रपति की स्वीकृति और उसके बाद अधिसूचना के बिना इसे अभी पूर्ण रूप से लागू कानून नहीं माना जा सकता।
सतपुड़ा एक्सप्रेस विशेष रिपोर्ट
आलोक सूर्यवंशी















