कहां बन रहे हैं और कौन सी कंपनियां कर रही हैं निर्माण?
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सतपुड़ा एक्सप्रेस | विशेष रिपोर्ट — आलोक सूर्यवंशी
नई दिल्ली:मोबाइल से लेकर कार, एआई, सैटेलाइट और मिसाइल तक—हर आधुनिक तकनीक की रीढ़ है सेमीकंडक्ट आज दुनिया की अर्थव्यवस्था और तकनीक में सेमीकंडक्टर सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में शामिल हो चुका है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टीवी, कार, इलेक्ट्रिक वाहन, रेलवे, मेडिकल उपकरण, दूरसंचार, डेटा सेंटर, ड्रोन, सैटेलाइट और रक्षा उपकरणों में सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल होता है।
भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में मजबूत रहा है, लेकिन अब देश में चिप निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और फैब्रिकेशन का पूरा इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
क्या होता है सेमीकंडक्टर?
सेमीकंडक्टर यानी अर्धचालक ऐसी सामग्री है जिसकी विद्युत चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है। सामान्य तौर पर सिलिकॉन इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला पदार्थ है।
इसी से अत्यंत छोटे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बनाए जाते हैं जिन्हें आम भाषा में चिप कहा जाता है।
इन चिप्स में अरबों तक ट्रांजिस्टर हो सकते हैं। यही ट्रांजिस्टर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बिजली के प्रवाह और सूचनाओं को नियंत्रित करते हैं।
आसान भाषा में समझें
सेमीकंडक्टर = इलेक्ट्रॉनिक दुनिया का दिमाग और नियंत्रण प्रणाली।
मोबाइल में प्रोसेसर से लेकर कार के इंजन कंट्रोल, एआई सर्वर और मिसाइल की इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली तक—हर जगह अलग-अलग प्रकार की चिप काम करती है।
सेमीकंडक्टर का क्या उपयोग है?
सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल प्रमुख रूप से इन क्षेत्रों में होता है—
📱 स्मार्टफोन और टैबलेट
💻 कंप्यूटर और लैपटॉप
🚗 कार और इलेक्ट्रिक वाहन
🤖 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स
🛰️ सैटेलाइट और अंतरिक्ष तकनीक
🛡️ रक्षा और मिसाइल सिस्टम
📡 5G और दूरसंचार
🏭 औद्योगिक मशीनरी
🏥 मेडिकल एवं डायग्नोस्टिक उपकरण
⚡ बिजली के उपकरण और सोलर इन्वर्टर
🚆 रेलवे और परिवहन व्यवस्था
🏦 डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग
भारत में कहां बन रहे हैं सेमीकंडक्टर?
भारत सरकार के सेमीकॉन इंडिया मिशन के तहत देश के कई राज्यों में चिप निर्माण और पैकेजिंग इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।
- गुजरात — भारत का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर हब
गुजरात में सबसे ज्यादा बड़े सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट विकसित हो रहे हैं।
साणंद में Micron की सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट सुविधा स्थापित की गई है। इसमें DRAM और NAND मेमोरी उत्पादों की असेंबली और टेस्टिंग होगी। परियोजना का निवेश करीब ₹22,516 करोड़ है।
Kaynes Semicon ने भी साणंद में अपनी सेमीकंडक्टर इकाई शुरू की है। प्रधानमंत्री ने मार्च 2026 में इस संयंत्र का उद्घाटन किया था और यहां व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। इसकी क्षमता करीब 60 लाख चिप प्रतिदिन तक बताई गई है।
CG Power, जापान की Renesas Electronics और Thailand की Stars Microelectronics के साथ मिलकर साणंद में सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित कर रही है। इसकी प्रस्तावित क्षमता लगभग 1.507 करोड़ यूनिट प्रतिदिन है।
गुजरात के धोलेरा में Tata Electronics का बड़ा semiconductor fab विकसित हो रहा है। इसमें Taiwan की PSMC के साथ तकनीकी साझेदारी है। परियोजना का निवेश लगभग ₹91,526 करोड़ है और प्रस्तावित क्षमता 50,000 wafer starts प्रति माह है।
- असम — पूर्वोत्तर भारत में चिप पैकेजिंग
मोरीगांव, असम में Tata Electronics की semiconductor assembly और testing facility स्थापित की जा रही है।
इस परियोजना में लगभग ₹27,120 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और क्षमता करीब 4.8 करोड़ यूनिट प्रतिदिन बताई गई है।
यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
- उत्तर प्रदेश — Jewar में HCL-Foxconn
जेवर, उत्तर प्रदेश में HCL और Foxconn की संयुक्त परियोजना के तहत सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित की जा रही है।
इसमें मुख्य रूप से Display Driver ICs तैयार किए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल मोबाइल, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल और अन्य डिस्प्ले वाले उपकरणों में होता है।
परियोजना का निवेश लगभग ₹3,700 करोड़ और क्षमता करीब 36 मिलियन यूनिट प्रति माह बताई गई है।
- ओडिशा — Silicon Carbide और Advanced Packaging
भुवनेश्वर के Info Valley में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आ रही हैं।
SiCSem द्वारा Silicon Carbide यानी SiC आधारित compound semiconductor fab स्थापित किया जा रहा है। सरकार के अनुसार यह देश की पहली commercial compound semiconductor fab परियोजना है। इसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, रेलवे, फास्ट चार्जर, डेटा सेंटर और सोलर इन्वर्टर जैसे क्षेत्रों में हो सकता है।
इसी क्षेत्र में 3D Glass Solutions advanced semiconductor packaging और glass substrate तकनीक पर काम करेगी। इसका उपयोग AI, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, रक्षा, ऑटोमोबाइल और अन्य उन्नत क्षेत्रों में हो सकता है।
compound semiconductor fab परियोजना है। इसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, रेलवे, फास्ट चार्जर, डेटा सेंटर और सोलर इन्वर्टर जैसे क्षेत्रों में हो सकता है।
इसी क्षेत्र में 3D Glass Solutions advanced semiconductor packaging और glass substrate तकनीक पर काम करेगी। इसका उपयोग AI, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, रक्षा, ऑटोमोबाइल और अन्य उन्नत क्षेत्रों में हो सकता है।
- पंजाब — मोहाली में Semiconductor Manufacturing
Continental Device India Limited (CDIL) पंजाब के मोहाली में अपनी semiconductor manufacturing क्षमता का विस्तार कर रही है।
यहां MOSFET, IGBT, Schottky diode और transistors जैसे high-power semiconductor devices तैयार किए जाएंगे। इनमें Silicon और Silicon Carbide दोनों तकनीक का इस्तेमाल होगा।
- आंध्र प्रदेश
Advanced System in Package Technologies (ASIP) आंध्र प्रदेश में semiconductor manufacturing unit स्थापित कर रही है।
इस परियोजना की प्रस्तावित क्षमता करीब 9.6 करोड़ यूनिट प्रति वर्ष है और इसमें दक्षिण कोरिया की APACT के साथ तकनीकी साझेदारी है।
कौन-कौन सी कंपनियां भारत में सेमीकंडक्टर बना रही हैं?
भारत में इस क्षेत्र में प्रमुख कंपनियां और साझेदारियां इस प्रकार हैं—
कंपनी/समूह स्थान प्रमुख काम
Micron Technology साणंद, गुजरात DRAM/NAND असेंबली व टेस्ट
Tata Electronics + PSMC धोलेरा, गुजरात Semiconductor Fab
Tata Electronics मोरीगांव, असम Assembly & Testing
Kaynes Semicon साणंद, गुजरात Semiconductor Packaging/OSAT
CG Power + Renesas + Stars साणंद, गुजरात Semiconductor Packaging
HCL + Foxconn जेवर, उत्तर प्रदेश Display Driver Chips
SiCSem भुवनेश्वर, ओडिशा Silicon Carbide Semiconductor
3D Glass Solutions भुवनेश्वर, ओडिशा Advanced Packaging
CDIL मोहाली, पंजाब Power Semiconductor Devices
ASIP Technologies आंध्र प्रदेश Semiconductor Packaging
इनमें से कुछ परियोजनाओं में उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि कई इकाइयां निर्माण या विकास के चरण में हैं। अप्रैल 2026 में सरकार ने बताया था कि ISM के तहत 10 इकाइयां निर्माणाधीन थीं और दो संयंत्रों से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका था।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सेमीकंडक्टर?
दुनिया में चिप की मांग लगातार बढ़ रही है। खासकर AI, इलेक्ट्रिक वाहन, 5G, डेटा सेंटर और रक्षा तकनीक में अत्याधुनिक चिप्स की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।
कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक chip shortage ने यह भी दिखाया कि दूसरे देशों पर अत्यधिक निर्भरता कितनी बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है।
भारत अब केवल मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि चिप डिजाइन से लेकर fabrication, packaging और testing तक पूरी सप्लाई चेन देश में विकसित करने की कोशिश कर रहा है।
अब Semicon 2.0 से नई रफ्तार
31 अगस्त 2026 को सरकार ने Semicon 2.0 के छह प्रमुख क्षेत्रों की दिशा स्पष्ट की। इसमें semiconductor design, मशीन और materials, नए fabs, ATMP/OSAT, research & development और talent development शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य भारत में पूरे semiconductor ecosystem को मजबूत करना है।
निष्कर्ष
सेमीकंडक्टर केवल एक छोटी-सी चिप नहीं है, बल्कि आधुनिक अर्थव्यवस्था की आधारभूत तकनीक है।
भारत में गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में तेजी से परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। Tata, Micron, Kaynes, CG Power, HCL-Foxconn, SiCSem, CDIL और अन्य कंपनियों के निवेश से भारत का लक्ष्य आने वाले वर्षों में दुनिया की semiconductor supply chain में महत्वपूर्ण स्थान बनाना है।
यानी आने वाला समय केवल ‘Made in India’ मोबाइल या कार का नहीं, बल्कि ‘Made in India Chip’ का भी हो सकता है।















