आधुनिक दौर में रक्षाबंधन का दायरा केवल परिवार की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को एक बड़ा नैतिक दायित्व सौंपता है
रिपोर्ट : आलोक सूर्यवंशी ☎️8817448817
सतपुड़ा एक्सप्रेस नई दिल्ली: भाई-बहन के अटूट विश्वास, स्नेह और सुरक्षा का पावन पर्व रक्षाबंधन इस वर्ष शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाएगा। रेशमी धागे से बंधा यह पावन संबंध केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि सुरक्षा, परस्पर विश्वास और आजीवन साथ निभाने का एक अटूट संकल्प है।
रक्षाबंधन 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और भद्रा का समय पंचांग गणना के अनुसार, इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। भद्रा काल 27 अगस्त की रात को ही समाप्त हो जाने के कारण 28 अगस्त की सुबह का पूरा समय राखी बांधने के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी है।
पर्व की तारीख: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 27 अगस्त 2026, सुबह 09:08 बजे से पूर्णिमा तिथि समाप्त: 28 अगस्त 2026, सुबह 09:48 बजे तक राखी बांधने का सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त: 28 अगस्त, सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक (कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 51 मिनट) भद्रा की स्थिति: 28 अगस्त को सूर्योदय से पूर्व ही भद्रा समाप्त हो जाएगी, अतः सुबह के मुहूर्त में भद्रा का कोई अवरोध नहीं है। वैकल्पिक अपराह्न समय: जो लोग सुबह रक्षासूत्र नहीं बांध पाते हैं, वे दोपहर में अपराह्न काल (दोपहर 01:30 बजे से 04:00 बजे के बीच) में भी पूजन कर सकते हैं।
पौराणिक व ऐतिहासिक आख्यानों में रक्षाबंधनरक्षाबंधन की परंपरा हमारे प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रसंगों में गहराई से रची-बसी है:
भगवान श्री कृष्ण और द्रौपदी:
महाभारत प्रसंग के अनुसार, जब शिशुपाल वध के समय भगवान कृष्ण की उंगली से रक्त बहने लगा, तब द्रौपदी ने अपनी रेशमी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। श्री कृष्ण ने इस धागे की लाज रखते हुए चीरहरण के संकट के समय द्रौपदी के मान-सम्मान की रक्षा की थी।
रानी कर्णावती और हुमायूं:
मध्यकालीन इतिहास में चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने बहादुर शाह के आक्रमण से राज्य की रक्षा के लिए मुगल शासक हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने इस रक्षासूत्र का मान रखते हुए तुरंत चित्तौड़ की सहायता के लिए सेना भेजी।
राजा बलि और मां लक्ष्मी:
पाताल लोक में राजा बलि के यहां पहरेदार बने भगवान विष्णु को वैकुंठ वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भाई बनाया और उपहार में श्री हरि को मांग लिया था।
वर्तमान परिदृश्य:
कलाई के धागे से आगे, महिला सम्मान और सुरक्षा का संकल्प आधुनिक दौर में रक्षाबंधन का दायरा केवल परिवार की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को एक बड़ा नैतिक दायित्व सौंपता है
हर नारी के सम्मान का संकल्प: रक्षा का दायित्व केवल अपनी बहन तक सीमित न रखकर समाज की प्रत्येक महिला और बालिका को निर्भय, सुरक्षित और गरिमामय वातावरण देने का होना चाहिए।सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता: आज बहनों को केवल ‘संरक्षण’ की नहीं, बल्कि उनकी उच्च शिक्षा, करियर, निर्णय लेने की स्वतंत्रता और स्वावलंबन में समान सहयोग की आवश्यकता है।
समानता का दृष्टिकोण: वर्तमान में कई बहनें सीमाओं पर देश की रक्षा में तैनात जवानों को, पुलिसकर्मियों को और एक-दूसरे को भी रक्षासूत्र बांधकर सामाजिक एकता और नारी शक्ति का संदेश दे रही हैं।रक्षाबंधन का यह पावन पर्व तभी अपनी सच्ची सार्थकता पाएगा, जब हमारी सामाजिक सोच में बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान, समानता और पूर्ण सुरक्षा का भाव दिन-प्रतिदिन मजबूत होगा।















