सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा।सार्वजनिक नीति का मूल्यांकन भावनाओं या राजनीतिक प्रतीकों के आधार पर नहीं, बल्कि परिणामों के आधार पर होना चाहिए। MGNREGA की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम, 2025 (VB GRAM G) लाए जाने के बाद विरोध शुरू हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि यह नया कानून मजदूरों के अधिकार कमजोर करता है, राज्यों पर बोझ बढाता है, केंद्र का नियंत्रण बढ़ाता है और महात्मा गांधी का नाम हटाता है। लेकिन ये आपत्तियों कई बार नीति की वास्तविकता से ज्यादा राजनीतिक लगती हैं।
मुख्य तर्क यह दिया जा रहा है कि VB GRAM G अधिकार आधारित व्यवस्था को खत्म कर रहा है। लेकिन MGNREGA के अनुभव से स्पष्ट है कि केवल कानून में अधिकार लिख देने से ही सशक्तिकरण नहीं होता। मजदूरी भुगतान में देरी, काम की मांग पूरी न होना, घटिया परिसंपतियाँ और असमान क्रियान्वयन जैसी समस्याओं ने योजना को कमजोर किया। यदि किसी योजना में समय पर और सही तरीके से लाभ नहीं मिल रहा, तो वह अधिकार व्यवहार में अर्थहीन हो जाता है। VB GRAM G सरकार की जिम्मेदारी खत्म नहीं करता, बल्कि समय-सीमा तय करके, परिणाम आधारित फंडिंग और जवाबदेही बढाकर व्यवस्था को सुधारने की कोशिश करता है।
यह नया कानून विकास की सोच में बदलाव को भी दिखाता है। MGNREGA मुख्य रूप से ग्रामीण संकट के समय राहत देने के लिए बनाया गया था। लेकिन लंबे समय तक केवल संकट-आधारित रोजगार पर निर्भर रहने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ठहराव बढ़ सकता है। VB GRAM G अल्पकालिक रोजगार को आजीविका निर्माण, कौशल विकास और उपयोगी संपत्तियों के निर्माण से जोड़ता है। इसका उद्देश्य केवल काम के दिन गिनना नहीं, बल्कि लोगों को स्थायी आय और बेहतर भविष्य देना है।
राज्यों पर वितीय बोझ वढने की चिंता को भी बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। MGNREGA में कई बार केंद्र से राशि देर से आती थी और लागत साझा करने को लेकर विवाद होते थे। VB GRAM G में भूमिकाएँ स्पष्ट करने, बेहतर योजना बनाने और फंडिंग को अधिक अनुमानित बनाने का प्रयास किया गया है, जिससे राज्यों को योजना चलाने में सुविधा मिल सकती है।
केंद्र के अधिक नियंत्रण की बात भी पूरी तरह सही नहीं मानी जा सकती। इतनी बड़ी योजना में पारदर्शिता और निगरानी के लिए समान मानक जरूरी होते हैं। स्थानीय संस्थाएँ अब भी कार्यों का चयन और निगरानी करेंगी, लेकिन प्रदर्शन और जवाबदेही पर ज्यादा जोर होगा। पहले निगरानी कमजोर होने से कई बार मजदूरों की बजाय बिचौलियों को फायदा मिलता था।
महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया स्वाभाविक है, लेकिन तर्क यह है कि गांधीजी की सोच आत्मनिर्भरता, उत्पादक श्रम और स्थानीय विकास पर आधारित थी। केवल नाम बनाए रखना लेकिन व्यवस्था में अक्षमता स्वीकार करना उनकी विरासत का सम्मान नहीं है। टिकाऊ आजीविका और सामुदायिक संपत्तियों पर आधारित योजना उनके विचारों से अधिक मेल खा सकती है।
सुधारों का विरोध अक्सर होता है, खासकर जब पुरानी राजनीतिक धारणाएँ प्रभावित होती है। लेकिन सामाजिक कल्याण नीतियों को समय के साथ बदलना जरूरी है। VB GRAM G ग्रामीण रोजगार नीति को केवल इनपुट आधारित व्यवस्था से निकालकर परिणाम आधारित गारंटी की ओर ले जाने का प्रयास करता है। असली सवाल यह है कि देश ऐसी कल्याण प्रणाली चाहता है जो बदलती परिस्थितियों के अनुसार विकसित हो, या फिर ऐसी व्यवस्था जो पुराने ढांचे से चिपकी रहे।















