सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। जिले में कम बारिश और खरीफ फसलों को हुए नुकसान के मुद्दे पर किसान युवा शक्ति संगठन के बैनर तले 13 अक्टूबर को किसानों ने विशाल रैली निकाली। किसानों ने मान सरोवर बस स्टैंड से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने सहित अपनी 10 सूत्रीय मांगें रखीं।
कम बारिश से फसलों को नुकसान, सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग किसान युवा शक्ति संगठन के नेताओं का कहना है कि जिले में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने वर्षा के सरकारी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आंकड़े जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाते। संगठन ने मांग की कि वास्तविक वर्षा और फसलों की स्थिति का निष्पक्ष आकलन कर छिंदवाड़ा जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित किया जाए।किसानों ने प्रभावित किसानों को राहत राशि उपलब्ध कराने और फसल बीमा की राशि का जल्द भुगतान करने की भी मांग उठाई।
किसानों की 10 सूत्रीय मांगें ज्ञापन में किसानों ने कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:1. छिंदवाड़ा जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए।2. कम बारिश और फसल नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए।3. प्रभावित किसानों को राहत राशि का तत्काल भुगतान किया जाए।4. पात्र किसानों को फसल बीमा की राशि जल्द दिलाई जाए।5. माचागोरा बांध के डूब क्षेत्र से प्रभावित किसानों को चार गुना मुआवजा दिया जाए।6. चौसरा क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर परियोजना के संभावित खतरों का निष्पक्ष आकलन कराया जाए।7. माचागोरा लिफ्ट इरिगेशन योजना का काम जल्द पूरा किया जाए।8. स्मार्ट मीटर हटाने की मांग पर उचित कार्रवाई की जाए।9. गांवों की जर्जर सड़कों की मरम्मत कराई जाए।10. किसानों से जुड़ी अन्य समस्याओं का निराकरण कर मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए।
किसानों ने सरकार से की शीघ्र कार्रवाई की मांगकिसान युवा शक्ति संगठन ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। संगठन का कहना है कि फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति के आधार पर राहत उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसानों को मदद मिल सके।रैली के माध्यम से किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अपनी समस्याओं को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाना तथा मांगों का समाधान कराना है। अब इन मांगों पर प्रशासन और शासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर किसानों की नजर रहेगी।















