रबी सिंचाई के लिए 72,418 हेक्टेयर क्षेत्र में जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य, जलाशयों में पानी की उपलब्धता के आधार पर होगा वितरण
सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। जिले में रबी फसलों की सिंचाई के लिए 15 नवंबर 2026 से नहरें खोली जाएंगी। जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कलेक्टर हरेंद्र नारायन की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में सांसद विवेक बंटी साहू, अमरवाड़ा विधायक कमलेश प्रताप शाह, चौरई विधायक सुजीत सिंह चौधरी, पूर्व विधायक पं. रमेश दुबे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और उन्नत किसान मौजूद रहे।बैठक में निर्णय लिया गया कि इस बार जलाशयों में उपलब्ध पानी के अनुसार किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा। वहीं, एक पलेवा के लिए पिछले वर्षों की तरह 21 दिन के बजाय केवल 15 दिनों तक पानी उपलब्ध कराया जाएगा। जलाशयों में कम जलभराव को देखते हुए किसानों से कम पानी में तैयार होने वाली फसलें बोने की अपील की गई है।
72,418 हेक्टेयर क्षेत्र में होगी रबी सिंचाईबैठक में जिले के रबी सिंचाई लक्ष्य के तहत कुल 72,418 हेक्टेयर क्षेत्र में पानी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इसमें पेंच व्यपवर्तन वृहद परियोजना से 48,532 हेक्टेयर, 108 लघु सिंचाई परियोजनाओं से 17,880 हेक्टेयर और स्टॉप डैम एवं बैराज से 6,006 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा।सांसद विवेक बंटी साहू और अन्य जनप्रतिनिधियों ने नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिंचाई व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि टेल क्षेत्र के किसानों को भी पर्याप्त पानी मिल सके।
जलभराव के आधार पर मिलेगा सिंचाई का पानी बैठक में 30 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार जिले की 153 सिंचाई योजनाओं के जलभराव की जानकारी प्रस्तुत की गई। इनमें एक वृहद पेंच परियोजना, एक मध्यम कन्हरगांव परियोजना, 108 लघु सिंचाई परियोजनाएं और 43 स्टॉप डैम शामिल हैं।प्रस्तुत जानकारी के अनुसार पेंच व्यपवर्तन वृहद परियोजना में 88.5 प्रतिशत, जबकि कन्हरगांव परियोजना में केवल 5 प्रतिशत जलभराव है। जिले के 44 जलाशयों में जलभराव 0 से 25 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया है।
समिति ने जलाशयों में उपलब्ध पानी के आधार पर सिंचाई के लिए पानी देने का निर्णय लिया है।
– 100 प्रतिशत भरे जलाशय: एक पलेवा और तीन बार सिंचाई का पानी।
– 75 प्रतिशत से अधिक, लेकिन 100 प्रतिशत से कम भरे जलाशय: एक पलेवा और दो बार सिंचाई का पानी।
– 50 से 75 प्रतिशत तक भरे जलाशय: एक पलेवा और एक बार सिंचाई का पानी।
– 25 से 50 प्रतिशत तक भरे जलाशय: केवल एक पलेवा का पानी।
इस व्यवस्था के तहत कम जलभराव वाले क्षेत्रों में किसानों को पानी का सीमित उपयोग करना होगा।चना, सरसों और मसूर की बोनी करने की सलाहजलाशयों में कम पानी की उपलब्धता को देखते हुए किसानों से कम सिंचाई में तैयार होने वाली फसलें लगाने की अपील की गई है।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने चना, सरसों एवं मसूर को बेहतर विकल्प बताते हुए इनके उत्पादन पर जोर देने की बात कही।किसानों को सलाह दी गई कि वे गेहूं की बोनी तभी करें, जब संबंधित जलाशय से तीन या उससे अधिक बार सिंचाई के लिए पानी मिलने की पर्याप्त संभावना हो। सांसद साहू ने किसानों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए।
पानी चोरी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई बैठक में निर्देश दिए कि नहरों में अवैध पंप लगाकर पानी चोरी करने वालों के खिलाफ संयुक्त टीम बनाकर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने जल की बर्बादी रोकने और उपलब्ध पानी का उचित उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया।बैठक में पानी चोरी रोकने के उद्देश्य से पंपों के लिए अस्थायी विद्युत कनेक्शन (टीसी) नहीं देने का निर्णय भी लिया गया। इसके साथ ही सभी स्टॉप डैमों के गेट 26 अक्टूबर तक बंद कराने और नहरों में आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए।
माइक्रो इरीगेशन परियोजनाओं की प्रगति पर जताई नाराजगी बैठक में सांसद साहू ने माइक्रो इरीगेशन परियोजना-1 और परियोजना-2 की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। इस पर कलेक्टर ने वरिष्ठ कार्यालय से समन्वय कर अर्धशासकीय पत्र तैयार करने के निर्देश कार्यपालन यंत्री को दिए।अमरवाड़ा विधायक कमलेश प्रताप शाह ने क्षेत्र में नए ट्रांसफार्मर उपलब्ध रखने के निर्देश दिए, ताकि ट्रांसफार्मर खराब होने की स्थिति में तत्काल बदला जा सके।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार, एसडीएम पुष्पेंद्र निगम, कार्यपालन यंत्री एवं समिति सचिव कुमकुम पटेल, पेंच परियोजना के कार्यपालन यंत्री जे.के. मर्सकोले एवं प्रभाकर टेकाम, अधीक्षण यंत्री सुनील कुमार सिन्हा सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।किसानों के लिए महत्वपूर्ण: इस रबी सीजन में सिंचाई के पानी का वितरण जलाशयों के वास्तविक जलभराव के आधार पर होगा। ऐसे में किसानों को फसल का चयन उपलब्ध सिंचाई और पानी की संभावित मात्रा को ध्यान में रखकर करने की जरूरत है।















