नैनपुर के भड़िया में सीआरए कार्यक्रम के तहत डीएसआर खेतों का संयुक्त निरीक्षण
सतपुड़ा एक्सप्रेस मंडला।मध्यप्रदेश शासन एवं बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम’ (Climate Resilient Agriculture – CRA Program) के अंतर्गत, नैनपुर विकासखंड के ग्राम भड़िया में धान की सीधी बुवाई (DSR तकनीक) प्रदर्शन प्रक्षेत्रों का विभागीय अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के दल द्वारा सघन स्थलीय निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण दल में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) पंचशीला वरकड़े, कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) सरोज बरवे तथा बीसा के तकनीकी सहायक शुभांक दीक्षित सम्मिलित रहे। संयुक्त दल ने प्रगतिशील कृषक यशवंत राय एवं फूल सिंह डहेरिया के खेतों में स्थापित सीआरए मॉडल्स का अवलोकन कर फसल की वानस्पतिक वृद्धि, कल्ले फूटने (टिलरिंग), जड़ों के फैलाव और मृदा स्वास्थ्य का सूक्ष्म परीक्षण किया।
जलवायु जोखिम प्रबंधन और संसाधन संरक्षण का सशक्त मॉडल**सीआरए कार्यक्रम के तकनीकी उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों द्वारा कृषकों को समझाया गया कि पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में सीधी बुवाई किस प्रकार जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों (अनियमित वर्षा व अल्पवृष्टि) के विरुद्ध सुरक्षा कवच का कार्य करती है। निरीक्षण के दौरान फसल संरक्षण, वैज्ञानिक खरपतवार नियंत्रण और सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन पर विस्तृत तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया।
**किसानों ने भी साझा किए अपने अनुभव, सीधी बुवाई को बताया बेहद फायदेमंद**प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान उपस्थित कृषक यशवंत राय, फूल सिंह डहेरिया सहित अन्य किसानों ने भी अधिकारियों के समक्ष अपने प्रत्यक्ष अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि:* **जल संरक्षण एवं ईंधन की भारी बचत:** खेत में कद्दू (मचाई) न करने से ट्रैक्टर का समय और डीजल दोनों बचे। पारंपरिक रोपाई की तुलना में पानी की खपत काफी कम रही, जिससे सीमित सिंचाई में भी फसल बेहतर स्थिति में है।*
**मजदूरी और नर्सरी खर्च से मुक्ति:** अलग से थरहा (नर्सरी) डालने और रोपाई के समय महंगे मजदूरों के झंझट से पूरी तरह राहत मिली, जिससे फसल की शुरुआती लागत लगभग शून्य हो गई।* *
*मजबूत जड़ें और बेहतर बढ़वार:** खेत की मिट्टी सख्त न होने के कारण पौधों की जड़ें गहराई तक गईं, जिससे पौधों में सूखे और तेज हवाओं को सहने की क्षमता बढ़ गई है।वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्रीमती पंचशीला वरकड़े ने किसानों के अनुभवों की सराहना करते हुए कहा कि सीआरए कार्यक्रम के अंतर्गत अपनाई जा रही डीएसआर पद्धति न केवल पर्यावरण व जलस्रोतों को सुरक्षित करती है, बल्कि किसानों की लागत घटाकर शुद्ध आय बढ़ाने और खेती को मौसम के प्रति लचीला (Climate Resilient) बनाने में अत्यंत कारगर सिद्ध हो रही है।















