सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। हर्रई एकलव्य विद्यालय में पूर्व बीईओ एवं प्रभारी प्राचार्य प्रकाश कलम्बे के कार्यकाल से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के बाद पिछले तीन दिनों से जांच दल विद्यालय पहुंचकर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहा है।
जांच के दौरान अब एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2019-20,2020-21,2021-22,और 2022-23 से संबंधित रिकॉर्ड फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। रिकॉर्ड के अभाव में इन वर्षों के दौरान विद्यालय में हुई खरीदी, भुगतान और अन्य वित्तीय गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तीन सदस्यीय टीम कर रही जांच जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सतेंद्र सिंह मरकाम द्वारा शिकायत की जांच के लिए तीन सदस्यीय दल का गठन किया गया था। सहायक संचालक लक्ष्मीकांत मिश्रा के नेतृत्व में गठित टीम में कन्या परिसर जुन्नारदेव के प्राचार्य मनोज श्रीवास्तव और कन्या परिसर अमरवाड़ा के प्राचार्य मिथलेश शिवने को शामिल किया गया है।जांच दल लगातार विद्यालय पहुंचकर वित्तीय दस्तावेजों, खरीदी प्रक्रिया और नियुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं में वास्तविक स्थिति क्या रही।
पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने से बढ़ी चिंता सबसे अहम सवाल वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के रिकॉर्ड को लेकर है।कोरोना कल में हुई थी जमकर खरीदी यदि इन वर्षों के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं,इस बात का उल्लेख rti के एक आवेदन के जबाव में प्राचार्य ने लिखित में दिया है तो जांच अधिकारियों के सामने संबंधित अवधि के खर्च, खरीदी और भुगतान की सत्यता की पुष्टि करना चुनौती बन सकती है।वहीं, शिकायत में पूर्व बीईओ एवं प्रभारी प्राचार्य प्रकाश कलम्बे के कार्यकाल से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
अब जांच दल द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
जल्द हो सकता है कथित गड़बड़ी का खुलासा तीन दिनों से चल रही जांच के बीच उम्मीद जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद पूर्व बीईओ एवं प्रभारी प्राचार्य प्रकाश कलम्बे के कार्यकाल में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है। हालांकि, जांच रिपोर्ट सामने आने तक किसी भी आरोप को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट में पुराने वित्तीय रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और विद्यालय में हुई खरीदी सहित अन्य वित्तीय मामलों को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।















