जिला मुख्यालय से कुछ किलोमीटर की दूरी पर परासिया विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, प्राचार्य और शिक्षकों की अनुपस्थिति का आरोप; मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी को लेकर भी बहस
सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के शासकीय स्कूलों में पत्रकारों और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर लागू प्रतिबंधों के बीच स्कूलों की निगरानी और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परासिया विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल जमुनिया जेठू की सामने आई तस्वीरें परिसर की बदहाली की ओर ध्यान आकर्षित कर रही हैं। यहां जगह-जगह कचरा, उगी हुई झाड़ियां और परिसर में घूमते मवेशी दिखाई दे रहे हैं।
स्कूल परिसर में गंदगी, स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल,उपलब्ध तस्वीरों में स्कूल परिसर के आसपास कचरे के ढेर और लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने जैसी स्थिति नजर आ रही है। परिसर में घास-फूस उगी हुई है और आवारा मवेशी भी घूमते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे माहौल में विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वच्छता और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।शौचालयों की स्थिति और रखरखाव पर उठे सवालप्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल के शौचालयों की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। यदि शौचालय अनुपयोगी हैं, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं की सुविधाओं पर पड़ सकता है। स्कूल में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की जांच कराना आवश्यक है।
प्राचार्य और शिक्षकों की अनुपस्थिति का आरोप ,स्थानीय स्तर पर स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों के नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए उपस्थिति रजिस्टर, निरीक्षण पंजिका और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट की जांच जरूरी है। शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्कूल में निर्धारित समय पर कक्षाएं संचालित हो रही हैं या नहीं।निरीक्षण के दौरान अव्यवस्था का दावाप्रस्तुत विवरण के अनुसार, निरीक्षण के दौरान परिसर में एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला परेशान अवस्था में दिखाई दी, जबकि दो व्यक्ति आपस में उलझते नजर आए। इस स्थिति में स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन घटनाओं और स्कूल स्टाफ की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मीडिया की नो-एंट्री व्यवस्था पर बहस,शासकीय स्कूलों में पत्रकारों और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर लागू प्रतिबंधों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति की निगरानी किस तरह सुनिश्चित की जा रही है। स्कूलों में अनुशासन, शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है।
शिक्षा विभाग से जांच और कार्रवाई की मांग,जमुनिया जेठू शासकीय हाई स्कूल की साफ-सफाई, शौचालयों, शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों की जांच कराई जानी चाहिए। जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।अब सवाल यह है कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इन बुनियादी मुद्दों पर शिक्षा विभाग कब संज्ञान लेगा और स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?















