सतपुड़ा एक्सप्रेस जबलपुर। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने वर्ष 2019 में OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के प्रावधान को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश में OBC वर्ग को मिलने वाला आरक्षण अब 14 प्रतिशत ही रहेगा। हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में रोके गए 13 प्रतिशत पदों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की पीठ ने सुनाया फैसला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित खंडपीठ में न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ ने OBC आरक्षण से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया। मामला वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा OBC आरक्षण बढ़ाने के लिए किए गए संशोधन से जुड़ा था।आरक्षण बढ़ाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी। इस मामले में आरक्षण बढ़ाने के पक्ष और विरोध में कई याचिकाएं दायर हुई थीं। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को आए फैसले के बाद 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रावधान निरस्त हो गया है।
50 प्रतिशत आरक्षण सीमा और पर्याप्त आंकड़ों पर सवाल वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में OBC आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इसके बाद आरक्षण की संवैधानिक वैधता को लेकर विवाद शुरू हुआ और मामला लंबे समय तक अदालत में विचाराधीन रहा।सुनवाई के दौरान आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा, पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व और आरक्षण बढ़ाने के लिए आवश्यक आंकड़ों पर विचार किया गया। अदालत के फैसले के अनुसार, आरक्षण की निर्धारित सीमा से आगे जाने के लिए विशेष परिस्थितियों और पर्याप्त संवैधानिक आधार का होना जरूरी है।
तीन महीने में भरने होंगे रोके गए 13 प्रतिशत पद हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में विवाद के कारण रोके गए 13 प्रतिशत पदों को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC), कर्मचारी चयन मंडल और संबंधित भर्ती एजेंसियों को इन पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी।इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी नियुक्तियां आरक्षण विवाद के चलते लंबे समय से लंबित थीं। भर्ती एजेंसियों को अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी।
पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों को लेकर क्या है स्थिति?उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के आधार पर नियुक्त किए गए अभ्यर्थियों की नौकरियों को सुरक्षित रखने का निर्देश भी मामले में महत्वपूर्ण है। इन नियुक्तियों और रोके गए पदों के समायोजन को लेकर भर्ती एजेंसियों को विस्तृत आदेश के अनुरूप कदम उठाने होंगे।90 से अधिक याचिकाओं के बाद आया फैसलाOBC आरक्षण को 27 प्रतिशत करने के मुद्दे पर अशिता दुबे सहित 90 से अधिक याचिकाएं दायर होने की जानकारी सामने आई थी। सामान्य वर्ग की ओर से आरक्षण बढ़ाने की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए, जबकि OBC पक्ष ने बढ़े हुए आरक्षण के समर्थन में दलीलें रखीं।
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में पुराने आयोगों की रिपोर्ट और उपलब्ध आंकड़ों का हवाला दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को निरस्त कर दिया और प्रदेश में OBC आरक्षण 14 प्रतिशत रखने का निर्णय दिया।भर्ती परीक्षाओं और अभ्यर्थियों पर पड़ेगा असरहाईकोर्ट के इस फैसले का असर प्रदेश में चल रही और आगामी सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। विशेष रूप से उन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिन्हें आरक्षण विवाद के कारण रोका गया था।
अब संबंधित भर्ती एजेंसियों को तीन महीने की निर्धारित समय-सीमा में अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा।निष्कर्ष: मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 27 प्रतिशत करने का वर्ष 2019 का प्रावधान निरस्त होने के बाद आरक्षण 14 प्रतिशत रहेगा। साथ ही, रोके गए 13 प्रतिशत पदों पर पात्र अनारक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए भर्ती एजेंसियों को तीन महीने का समय दिया गया है।















