सतपुड़ा एक्सप्रेस छिन्दवाड़ा/12 सितंबर 2026/ उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, मंत्रालय भोपाल के निर्देशानुसार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर 2026 तक किसान पंजीयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। किसान पंजीयनों के पर्यवेक्षण एवं मॉनीटरिंग के लिए जिला स्तरीय जिला उपार्जन समिति एवं उपखण्ड स्तरीय उपार्जन समिति का गठन किया गया है। पंजीयन एवं उपार्जन कार्य में आने वाली तकनीकी समस्याओं के निराकरण के लिए तकनीकी समिति का भी गठन किया गया है। जिले में किसान पंजीयन के लिए 24 पंजीयन केन्द्र बनाए गए हैं।
पंजीयन केन्द्रों में निःशुल्क किसान पंजीयन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा आवश्यकतानुसार ग्राम पंचायत कार्यालय, जनपद कार्यालय एवं तहसील कार्यालय में स्थापित सुविधा केन्द्रों पर भी निःशुल्क पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रति पंजीयन अधिकतम 50 रुपये शुल्क पर एमपी ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेंटर के कियोस्क, लोकसेवा केन्द्र तथा निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे में भी आवश्यकतानुसार किसान पंजीयन केन्द्र बनाए जा रहे हैं। सिकमी, बटाईदार, कोटरवार एवं वन पट्टाधारी किसानों के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति के अंतर्गत संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध रहेगी। किसान पंजीयन के लिए आधार लिंक बैंक खाता, समग्र आईडी, भूमि से संबंधित दस्तावेज सहित आवश्यक रिकॉर्ड लेकर पंजीयन केन्द्र पर उपस्थित होना होगा। किसान का पंजीयन बायोमेट्रिक सत्यापन अथवा आधार नंबर से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी के माध्यम से किया जाएगा। किसान का पंजीयन तभी हो सकेगा, जब भू-अभिलेख/एग्रीस्टेक में भूमि के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसीलदार/नायब तहसीलदार द्वारा किया जाएगा और सत्यापन होने की स्थिति में ही पंजीयन मान्य होगा।
वनाधिकार पट्टाधारी किसानों का वन पट्टा तथा सिकमी/बटाईदार किसानों का सिकमी/बटाई अनुबंध 15 सितंबर 2026 के पूर्व अवधि का एवं निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत होना आवश्यक है। सिकमी/बटाईदार किसानों की अनुबंध अवधि मध्यप्रदेश भू-स्वामी एवं बटाईदार के हितों के संरक्षण अधिनियम 2026 की कंडिका 4(3) के अनुसार अधिकतम 5 वर्ष होगी। इससे अधिक अवधि का अनुबंध पंजीयन के लिए विधिमान्य नहीं माना जाएगा। किसान पंजीयन का सत्यापन संबंधित नायब तहसीलदार, तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत 21 सितंबर 2026 से 15 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। बोई गई फसल का किसान पंजीयन के लिए ई-गिरदावरी होना अनिवार्य है। ई-गिरदावरी के डाटा के आधार पर ही किसान पंजीयन ई-उपार्जन पोर्टल पर ऑनलाइन किया जाएगा।
कलेक्टर हरेंद्र नारायन द्वारा जिला एवं उपखण्ड स्तरीय उपार्जन समितियों से संबंधित सभी अधिकारी-कर्मचारियों को किसान पंजीयन की आवश्यक तैयारियां पूर्व से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किसानों में पंजीयन के संबंध में प्रचार-प्रसार कर निर्धारित समयावधि में किसान पंजीयन एवं उसके सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। वनाधिकार पट्टाधारी एवं सिकमी/बटाईदार किसानों से अपील की गई है कि वे किसान पंजीयन के लिए निर्धारित प्रारूप में भूमि का अनुबंध 15 सितंबर 2026 के पूर्व तैयार करा लें, ताकि किसान पंजीयन की प्रक्रिया सुगमता से पूर्ण हो सके














