सतपुड़ा एक्सप्रेस पांढुर्णा। मध्यप्रदेश के पांढुर्णा में आयोजित प्रसिद्ध पारंपरिक गोटमार मेले में इस बार भी पत्थरबाजी का खूनी खेल देखने को मिला। जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 834 लोग घायल बताए गए हैं। घायलों में कई लोगों के सिर में चोटें आई हैं, जबकि एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट गई। करीब 9 घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पत्थरों की लगातार होती बौछार के बीच मेले में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों ने बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागकर अपनी जान बचाई। घायलों को मेला क्षेत्र में बनाए गए अस्थायी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचाया गया।
झंडे पर कब्जे को लेकर होता है पत्थरबाजी का मुकाबला,गोटमार मेले की परंपरा के अनुसार पांढुर्णा और सावरगांव के लोग जाम नदी के दोनों किनारों पर एकत्र होते हैं। नदी के बीच एक झंडा लगाया जाता है। इस झंडे पर कब्जा करने के लिए दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा के दौरान हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं और कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
इलाज के लिए 7 स्वास्थ्य केंद्र, 44 डॉक्टर और 22 एंबुलेंस तैनात,प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मेले में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। यहां 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है, जबकि घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 22 एंबुलेंस तैनात की गई हैं।
गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जरूरत के अनुसार बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया।सुरक्षा के लिए 700 पुलिसकर्मी, ड्रोन और CCTV से निगरानीगोटमार मेले को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। मेला क्षेत्र में करीब 700 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। भीड़ और पत्थरबाजी पर नजर रखने के लिए 10 CCTV कैमरों और 3 ड्रोन की मदद ली गई।
1955 से अब तक 14 लोगों की मौतगोटमार मेले में पत्थरबाजी की घटनाओं का पुराना इतिहास रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1955 से 2025 तक इस परंपरा के दौरान 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। प्रशासन की ओर से समय-समय पर पत्थरबाजी रोकने और इसके स्थान पर सुरक्षित तरीके अपनाने के प्रयास किए जाते रहे हैं।एक समय रबर बॉल से गोटमार कराने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन कुछ ही देर बाद रबर बॉल गायब हो गईं और दोबारा पत्थरों की बरसात शुरू हो गई।
गोटमार मेले की शुरुआत से जुड़ी हैं कई मान्यताएं,गोटमार मेले की शुरुआत को लेकर अलग-अलग किवदंतियां प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार इसकी शुरुआत भोसला राजाओं के सैनिकों के युद्धाभ्यास से जुड़ी है। वहीं दूसरी लोकप्रिय कहानी पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। कहा जाता है कि प्रेमी युगल को रोकने के दौरान दोनों पक्षों में पत्थरबाजी हुई और बाद में यही घटना गोटमार मेले की परंपरा में बदल गई।हालांकि स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि समय के साथ इस परंपरा का स्वरूप काफी बदल गया है। गोफन के इस्तेमाल, अवैध शराब और बढ़ती आक्रामकता के कारण मेले में खतरा पहले की तुलना में बढ़ गया है।
आज हुई गोटमार मेले में इस पत्थरबाजी में 1300 से अधिक घायल, 1185 सामान्य घायल, 7 गंभीर घायल नागपुर रेफर, 120 जिला अस्पताल रेफर एक के पैर की हड्डी टूटी पांढुरना वालों ने 6 बजे झंडा तोड़कर जीत हासिल की ।
जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थर बरसाए गए, जिसमें 1300से अधिक लोग घायल हो गए। जिसमें से 7= गंभीर घायलों को नागपुर पहुंचा गया एवं 120 घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। अंततः शाम 6:00 बजे पांडुरंग पक्ष में झंडा तोड़कर जीत हासिल की।
पत्थरबाजी के दौरान कई लोगों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट गई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल और स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचाया गया। अचानक शुरू हुई पत्थरों की बौछार के बीच कई लोगों को बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।गोटमार मेले की परंपरा में दोनों पक्षों के बीच झंडे पर कब्जे को लेकर मुकाबला होता है। नदी के बीच लगे झंडे को हासिल करने के लिए खिलाड़ी पत्थर चलाते हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते रहे हैं और कई बार मौतें भी हो चुकी हैं।प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाने के बावजूद पत्थरबाजी को पूरी तरह रोकना चुनौती बना हुआ है। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर होने वाले इस आयोजन को हिंसा से मुक्त और सुरक्षित स्वरूप कब दिया जाएगा।














