कानून-व्यवस्था में लापरवाही या पद का दुरुपयोग अस्वीकार्य:मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर की जायेगी कठोर कार्रवाई
सतपुड़ा एक्सप्रेस भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी में सामने आए गंभीर प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को संबंधित सीएसपी के विरुद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से जुड़े किन्हीं भी मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद का दुरुपयोग कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
क्या है पूरा मामला पुलिस विभाग में मची खलबली:
हत्या के मामले में राहत दिलाने के नाम पर 1 करोड़ की जमीन हड़पने का आरोप, CSP समेत अधिकारियों पर fir दर्ज मध्य प्रदेश के कटनी जिले में कानून के रखवालों पर ही गंभीर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। एक हत्याकांड के आरोपियों को राहत देने के एवज में करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन हड़पने और पीड़ित पक्ष को जेल भेजने के मामले में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया सहित अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज (FIR) किया गया है। न्यायालय के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?शिकायत के अनुसार, यह पूरा विवाद एक जमीन के सौदे और हत्याकांड की जांच से जुड़ा है।करोड़ों की जमीन का सौदा: पीड़ित रमेश लोधी की जमीन का सौदा करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपये में तय हुआ था। इस सौदे की केवल शुरुआती रकम दी गई और लगभग 92 लाख रुपये का बकाया भुगतान नहीं किया गया।
दबाव और मिलीभगत का खेल: आरोप है कि इस बकाया राशि को दबाने और जमीन पर कब्जा करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया। सीएसपी और तत्कालीन थाना प्रभारी पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित की कीमती जमीन को औने-पौने दामों पर अपने किसी करीबी व्यक्ति के नाम लिखवाने का दबाव बनाया।फंसाकर भेजा जेल: जब पीड़ित पक्ष ने इसका विरोध किया, तो पुलिस ने एक हत्या के मामले की जांच का रुख मोड़ दिया। न्याय दिलाने के बजाय पुलिस अधिकारियों ने मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए रमेश लोधी और उसके दामाद को ही हत्याकांड का आरोपी बनाकर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।अदालत के हस्तक्षेप के बाद हुई कार्रवाईजेल से रिहा होने के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में परिवाद दायर कर पूरे मामले के साक्ष्य पेश किए गए। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और पुलिस की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब सीएसपी नेहा पच्चीसिया और संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।विभाग में हड़कंप, उच्च स्तरीय जांच शुरूइस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय भी अलर्ट हो गया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर खाकी की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।















