भक्ति का महासंगम: पूज्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज की अमृतवाणी से गूंजा ‘हनुमान लोक’;*
**राम-कृष्ण की एकात्मता और भरत-लक्ष्मण के आदर्शों का मिला संदेश;*
*एशिया व इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होगा सामूहिक पाठ का विक्रम**
सतपुड़ा एक्सप्रेस जामसांवली/सौसर – 31 मार्च 2026*चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर ‘हनुमान लोक’ जामसांवली धाम में हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित दिव्य रामकथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धा, शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। विश्व विख्यात पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से राम-कृष्ण के एकत्व और राम-नाम की महिमा का मार्मिक वर्णन किया। कथा प्रारंभ करने के पूर्व पूज्य जगद्गुरु ने हनुमान जी की श्रीमूर्ति के दर्शन कर लोक-कल्याण की मंगल कामना की।*राम-कृष्ण एकत्व और आदर्शों का संदेश*पूज्य जगद्गुरु ने अपने प्रवचन में स्पष्ट किया कि भगवान राम और कृष्ण ने अलग-अलग युगों में भिन्न-भिन्न लीलाएं कीं, किंतु उनका स्वरूप एक ही है—दोनों ही धर्म स्थापना और भक्तों के उद्धार हेतु अवतरित हुए हैं। उन्होंने राम-नाम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन में राम का नाम बसते ही जीवन के समस्त दुख और संताप स्वतः दूर होने लगते हैं।भरत जी की अद्वितीय भक्ति का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भरत ने राजसिंहासन त्याग कर भगवान की पादुकाओं को ही अधिष्ठाता मानकर शासन किया, जो त्याग की सर्वोच्च मिसाल है। वहीं लक्ष्मण जी का सेवा भाव हमें हर परिस्थिति में कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। पूज्य जगद्गुरु ने जोर देकर कहा कि ईश्वर की भक्ति में जात-पात और ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है; केवल सच्ची श्रद्धा ही परमात्मा तक पहुँचने का मार्ग है।

*ऐतिहासिक सामूहिक सुंदरकांड: विश्व रिकॉर्ड की ओर बढ़ते कदम*हनुमान जन्मोत्सव के मंगल अवसर पर जामसांवली धाम में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया। हनुमत कृपापात्र पूज्य रसराज जी महाराज के सानिध्य में 15,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने एक स्वर में सामूहिक ‘सुंदरकांड’ एवं ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ किया। इस भव्य आयोजन की दिव्यता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इस सामूहिक पाठ के विक्रम को ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ एवं ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में सम्मिलित किया जा रहा है।इस ऐतिहासिक पाठ का ‘रामार्पण’ पूज्य जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने इस पाठ के माध्यम से विश्व में चल रही उथल-पुथल की शांति और भारत को ‘चक्रवर्ती राष्ट्र’ बनाने की मंगल कामना की।
*हनुमान जी के चिरंजीवी स्वरूप का वर्णन*सुंदरकांड वाचक रसराज महाराज ने बजरंग बली के चिरंजीवी स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि हनुमान जी केवल त्रेता युग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कलियुग में भी वे अपने भक्तों के बीच विद्यमान हैं। उन्हें प्रभु श्रीराम से अजर-अमर होने का वरदान प्राप्त है ताकि वे सदा धर्म की रक्षा कर सकें। उन्होंने कहा कि जहाँ भी राम-नाम का संकीर्तन होता है, वहाँ हनुमान जी की उपस्थिति अनिवार्य है।इस ऐतिहासिक अवसर पर तुलसीपीठ के उत्तराधिकारी आचार्य श्री रामचंद्र दास जी, पूज्य रसराज जी महाराज, कलेक्टर पांढुर्णा श्री नीरज कुमार वशिष्ठ, संस्थान के अध्यक्ष श्री गोपाल शर्मा, श्रीमती ज्योति चंद्रशेखर बावनकुले, पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा श्री अजय पांडे, सचिव टीकाराम कारोकर, संतोष डवरे, संदीप मोहोड, अजय धवले, श्री मनोहर शेलकी, श्री शिशिर खंडार सहित समस्त न्यासीगण एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।पूरा जामसांवली क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत होकर जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान रहा। कल चतुर्थ दिवस की कथा पुनः पूज्य जगद्गुरु की अमृतवाणी में नवीन प्रसंगों के साथ आरंभ होगी।















