फल-फूल रहा है फसल सिंडिकेट फसल लगी गेहूँ की रिकॉर्ड में चढ़ा है चना मटर
सतपुड़ा एक्सप्रेस एक्सक्लूसिव: अमरवाड़ा/तामिया/हर्रई (रिपोर्ट: आलोक सूर्यवंशी)अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों सरकारी रिकॉर्ड और ज़मीनी हकीकत के बीच एक ऐसी खाई नज़र आ रही है, जिसे विभाग की लापरवाही कहें या सोची-समझी साजिश।
सतपुड़ा एक्सप्रेस की पड़ताल में एक सक्रिय “फसल सिंडिकेट” का खुलासा हुआ है, जो राजस्व अमले के साथ साठगांठ कर सरकारी खजाने को चूना लगा रहा है।
क्या है पूरा खेल?
इस फर्जीवाड़े की जड़ ‘गिरदावरी’ (फसल का सरकारी इंदराज) में छिपी है। नियम यह है कि सर्वेयर द्वारा की गई गिरदावरी पर तहसीलदार/पटवारी सत्यापन करेगा, उसके बाद निरीक्षण अधिकारी द्वारा सत्यापन उपरांत अंतिम रूप दिया जाता है लेकिन हकीकत में दफ्तरों में बैठकर ही कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
गलत फसल का इंदराज: खाली पड़ी ज़मीन पर कीमती फसलें दिखाई जा रही हैं।फर्जी पंजीयन: इसी गलत गिरदावरी के आधार पर समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने के लिए फर्जी पंजीयन कराए जाते हैं।
मुनाफा वसूली: असली किसान की जगह सिंडिकेट के बिचौलिए सरकार को फसल बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट: इसी क्रम में हमारे द्वारा हिवरासनी हल्का के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए: खसरा नंबर 114/1 जहां कागजों पर चना और मटर की फसल गिरदावरी में लगी है और मौके पर गेहूँ की फसल पाई गई

हमारी टीम ने जब पटवारी हल्का मोहली भारत के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया, तो वहां भी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए थे:खसरा नंबर 441: रिकॉर्ड के अनुसार 1.526 हेक्टेयर (लगभग 3.75 एकड़) में चना लगा है, जबकि मौके पर 90% हिस्सा खाली पड़ा है।हल्का मोहली भारत का कुल आंकड़ा: यहाँ सरकारी पोर्टल पर 329.52 हेक्टेयर में दलहन (चना 162.27, मसूर 119, मटर 46.33) और 171 एकड़ में सरसों की फसल दर्ज है, जो भौतिक सत्यापन में संदिग्ध प्रतीत होती है।

असंगति: कई गांवों में जहाँ गेहूं लगा है, वहां रिकॉर्ड में चना ,मसूर या मटर चढ़ा दिया गया है। जहाँ जमीन पूरी तरह खाली है, वहां गेहूं की फसल दिखाई गई है।
गंभीर सवाल: प्रशासन की चुप्पी या सहमति?
- इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या पटवारी और जमीनी कर्मचारी बिना मौके पर जाए ही गिरदावरी को अंतिम रूप दे रहे हैं?
- बिना भौतिक सत्यापन के इतना बड़ा डेटा पोर्टल पर कैसे अपडेट हो गया?
- क्या इस “फसल सिंडिकेट” को स्थानीय प्रशासन का मूक समर्थन प्राप्त है?
किसानों की मांग: क्षेत्र के जागरूक किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में गिरदावरी का पुनः भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी पटवारियों व बिचौलियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए। क्या प्रशासन इन दोषियों पर नकेल कसेगा या फिर सरकारी राजस्व की इसी तरह लूट होती रहेगी?
प्रशासन से ‘सतपुड़ा एक्सप्रेस’ के 5 सीधे सवाल:
कागजी फसल या जमीनी हकीकत?
सभी पटवारी हल्कों में अनियमिताएं बिना तस्दीक के ‘डिजिटल’ खेल कैसे?
- जब पटवारी हल्का मोहली भारत के खसरा नंबर 441 पर 90% जमीन खाली पड़ी है, तो सरकारी पोर्टल पर वहां ‘चना’ की फसल,
- हिवरासानी हल्का में गेहूँ की फसल लगी है वहां चना/मटर की फसल किसने और किसके इशारे पर दर्ज की?
- नियमतः गिरदावरी के लिए खेत पर जाकर फोटो अपलोड करनी होती है। क्या प्रशासन यह स्वीकार करता है कि अमरवाड़ा में बिना भौतिक सत्यापन के ही दफ्तरों में बैठकर ‘फर्जी गिरदावरी’ का खेल चल रहा है?
राजस्व की लूट का जिम्मेदार कौन?गलत गिरदावरी के कारण सरकार पर जो अतिरिक्त वित्तीय भार (बोनस और एमएसपी के रूप में) पड़ रहा है, उसकी वसूली क्या उन दोषी कर्मचारियों से की जाएगी जिन्होंने गलत रिपोर्ट तैयार की?
जांच या सिर्फ खानापूर्ति?
क्या प्रशासन पूरे विधानसभा क्षेत्र में गिरदावरी के पुन: भौतिक सत्यापन के आदेश देगा, या फिर हर बार की तरह छोटी-मोटी जांच का हवाला देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?















