अमरवाड़ा में बरसों से चल रहा है फर्जी पंजीयन का खेल जिसकी शुरुआत होती है फर्जी गिरदावरी से
जाँच करने पर गिरदावरी मैं भारी अनियमिताएं पाई गई है
सतपुड़ा एक्सप्रेस एक्सक्लूसिव:अमरवाड़ा/तामिया/हर्रई: (रिपोर्ट:आलोक सूर्यवंशी) अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों फसलों की “फर्जी गिरदावरी” का एक बड़ा खेल सामने आ रहा है। आलम यह है कि सरकारी रिकॉर्ड (गिरदावली) और जमीन की हकीकत के बीच जमीन-आसमान का अंतर है।सतपुड़ा एक्सप्रेस टीम द्वारा जांच में क्षेत्र में एक सक्रिय सिंडिकेट काम कर रहा हैं जो इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा है,
अमरवाड़ा क्षेत्र में बरसों से फर्जी पंजीयन पर समर्थन मूल्य में फसल बेचने का मामला प्रशासन की देखरेख में चल रहा है जो अपने आप में ही सवाल खड़ा करता हैं किसान के नाम से “फसल सिंडिकेट” में लगे लोग मुनाफा बसूली कर रहे है जिसकी शुरुवात फसल की गिरदावली में सांठगांठ कर गलत फसल चढ़वाई जाती हैं और फिर समर्थन मूल्य में पंजीयन करवाकर मोटा मुनाफा कमाया जाता है यदि राजस्व महकमा द्वारा गिरदावली की प्रक्रिया को नियम अनुसार पूरा किया जाता तो फर्जी पजीयन से सरकार को होने वाले राजस्व में अतिरिक्त भार को कम किया जा सकता था
हमारे द्वारा जांच करने पर गिरदावली मैं गलत फसल की जानकारी चढ़ी होना पाया गया जांच के क्रम में पटवारी हल्का मोहली भारत के खसरा नंबर 441 जिसका रकबा 1.526 हेक्टेयर (लगभग 3.75एकड़) भूमि में चना की फसल की गिरदावली पाई है जबकि मौके पर भूमि का 90%भाग खाली पड़ा है हल्का मोहली भारत की पूरी गिरदावरी पर नज़र करें तो 329.52 हे. भूमि पर दलहन की फसल जिसमें 162.27 हे. चना,119 हे. मसूर, 46.33हे. मटर और लगभग 171एकड़ भूमि पर सरसों की गिरदावरी चढ़ी होना पाया गया है
हमारे द्वारा अलग-अलग हल्का के गांव का दौरा किया गया जिसमें भी खाली जमीन में गेहूं की गिरदावली चढ़ी पाई गई जहां गेहूं की फसल लगी है वहां मसूर चना या मटर की गिरदावली पाई गई और शासकीय पोर्टल में अपडेट की गई जो इस बात का प्रमाण है की ऐसी ही गलत जानकारी के कारण ही फसल सिंडिकेट का समर्थन मूल्य पर फसल बेचने का व्यापार फल फूल रहा है
















