Home AGRICULTURE अमरवाड़ा में ‘फसल सिंडिकेट’ का खेल, कागजों में लहलहा रही फर्जी फसलें

अमरवाड़ा में ‘फसल सिंडिकेट’ का खेल, कागजों में लहलहा रही फर्जी फसलें

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जांच करने पर गिरदावली मैं भारी अनियमिताएं पाई जा रही है

सतपुड़ा एक्सप्रेस एक्सक्लूसिव:अमरवाड़ा/तामिया/हर्रई: (रिपोर्ट:आलोक सूर्यवंशी) अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों फसलों की “फर्जी गिरदावली” का एक बड़ा खेल सामने आ रहा है। आलम यह है कि सरकारी रिकॉर्ड (गिरदावली) और जमीन की हकीकत के बीच जमीन-आसमान का अंतर है।

सतपुड़ा एक्सप्रेस टीम द्वारा जांच में क्षेत्र में एक सक्रिय सिंडिकेट काम कर रहा हैं जो इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा है,जिसमें वेयरहाउस संचालक भी अपनी कमाई बढ़ा रहे है सूत्र बताते ही कि वेयरहाउस संचालकों द्वारा मोटी रकम देकर समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र की अनुमति ला रहे है जिससे शासन को करोड़ों रुपये की चपत लगने की आशंका है।

खाली जमीन पर ‘उगा’ दीं फसलें

हैरानी की बात यह है कि विधानसभा क्षेत्र के कई हिस्सों में जहाँ जमीनें बंजर या खाली पड़ी हैं, वहां पटवारी रिकॉर्ड और गिरदावली में गेहूं, चना, मसूर और सरसों की फसलें दर्ज कर दी गई हैं। अमरवाड़ा से ही हर्रई और तमिया क्षेत्र में भी सिंडिकेट की दखल है सीधे तौर पर सरकारी खरीदी में माल बेचकर अनुचित लाभ और भावांतर की राशि को हड़पने की साजिश की ओर इशारा कर रहा है।

फसल कुछ और, रिकॉर्ड में कुछ और सिर्फ खाली जमीन ही नहीं, बल्कि जहाँ फसलें लगी भी हैं, वहां भी आंकड़ों की बाजीगरी की गई है।हकीकत: खेत में गेहूं की फसल खड़ी है। गिरदावली में उसी जगह पर चना, मसूर, सरसों या मटर दर्ज है।

आखिर क्यों हो रहा है यह फर्जीवाड़ा?

जानकारों की मानें तो इस फर्जी गिरदावली के पीछे तीन मुख्य कारण हो सकते हैं:सरकारी खरीदी का लाभ: ज्यादा उपज दिखाकर फर्जी तरीके से उपार्जन केंद्रों पर फसल बेचना।

फसल बीमा का खेल: भविष्य में प्राकृतिक आपदा के नाम पर मोटा बीमा क्लेम वसूलना।मुआवजा हड़पना: शासन द्वारा घोषित राहत राशि में सेंधमारी करना।

“मौके पर फसल कोई और है और सरकारी पोर्टल पर फसल कोई और। अमरवाड़ा से तामिया और हर्रई तक सिंडिकेट ने पूरे विधानसभा क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।

“प्रशासन की चुप्पी पर सवालइत ने बड़े पैमाने पर हो रहे फर्जीवाड़े के बावजूद संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों की चुप्पी संदेह पैदा करती है। क्या जमीनी स्तर के कर्मचारियों (पटवारियों) की इस सिंडिकेट से सांठगांठ है? क्या बिना भौतिक सत्यापन के ही गिरदावली को अंतिम रूप दिया जा रहा है?क्षेत्र के जागरूक किसानों ने मांग की है कि पूरे विधानसभा क्षेत्र में गिरदावली का पुनः भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी कर्मचारियों व बिचौलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

कैसे होती है गिरदावली और कहाँ होती है चूक?

शासन के नियमों के अनुसार गिरदावली एक पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्तरों पर जांच और सत्यापन होता है:1. सर्वेयर/पटवारी का काम (मैदानी सर्वे):प्रक्रिया की शुरुआत पटवारी या अनुबंधित सर्वेयर से होती है। इन्हें खेत पर जाकर ऐप के माध्यम से फसल की फोटो खींचनी होती है और फसल का प्रकार दर्ज करना होता है।लापरवाही: अक्सर सर्वेयर खेत पर सिंडिकेट के इशारे पर मनचाही फसल दर्ज कर देते हैं।

2. गिरदावली सत्यापन (Verification):पटवारी द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों का सत्यापन राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाता है।राजस्व निरीक्षक (RI): कुल रकबे का एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 10%) रैंडम चेक करना अनिवार्य है।

नायब तहसीलदार/तहसीलदार: इन्हें भी कुछ चुनिंदा खसरों का भौतिक सत्यापन करना होता है ताकि पटवारी की रिपोर्ट की सत्यता जांची जा सके।

3. अंतिम प्रकाशन और दावा-आपत्ति:गिरदावली दर्ज होने के बाद इसे सार्वजनिक किया जाता है ताकि किसान देख सकें। यदि फसल गलत दर्ज है, तो किसान आपत्ति ले सकता है।

खेल: सिंडिकेट ऐसे किसानों को चुनता है जो या तो शहर में रहते हैं या जिन्हें तकनीक की जानकारी नहीं है, ताकि उनकी खाली जमीन का उपयोग फर्जी रिकॉर्ड के लिए किया जा सके।निष्कर्ष:अगर अमरवाड़ा क्षेत्र में गेहूं की जगह चना-मसूर दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि पटवारी से लेकर सत्यापन करने वाले अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई या वे इस सिंडिकेट का हिस्सा हैं। बिना अधिकारियों की मिलीभगत के कागजों पर फसल बदलना मुमकिन नहीं है।

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