**छात्रों का संघर्ष, सरकारी उदासीनता और न्यायालय की चेतावनी**
सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। प्रदेश में मध्य प्रदेश प्री-नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट (MPPNST) 2022-23 के परीक्षा परिणाम को लेकर 66,000 छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। जबलपुर हाईकोर्ट ने 31 जनवरी 2025 को स्पष्ट आदेश दिया था कि परीक्षा का रिजल्ट जल्द से जल्द घोषित किया जाए, लेकिन सरकार और संबंधित विभागों ने इस आदेश को नजरअंदाज कर दिया।
तीन विभागों की जिम्मेदारी टालने की राजनीति** छात्रों ने DHS, ESB और MPNRC तक अदालत के आदेश की प्रति पहुंचाई, लेकिन तीनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे—
– **ESB (कर्मचारी चयन बोर्ड)**: “विभाग आदेश देगा तो रिजल्ट जारी करेंगे।”
– **DHS (स्वास्थ्य सेवा निदेशालय)**: “हम सिर्फ प्रशिक्षण देते हैं, रिजल्ट से हमारा कोई लेना-देना नहीं।”
– **MPNRC (मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल)**: “हम सिर्फ काउंसलिंग कर सकते हैं, रिजल्ट जारी करना हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।”
**छात्रों ने फिर खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
सरकारी निष्क्रियता से परेशान छात्रों ने 25 फरवरी 2025 को दोबारा हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए एक बार फिर आदेश दिया कि रिजल्ट तुरंत घोषित किया जाए। लेकिन सरकार और विभागों ने इसे भी अनसुना कर दिया।
18 मार्च 2025 को हाईकोर्ट का कड़ा रुख
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 18 मार्च 2025 को एक और आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि यदि 28 मार्च 2025 तक परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किया गया, तो MPESB (मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड) के सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा*।
– कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर 28 मार्च तक रिजल्ट घोषित नहीं हुआ, तो सरकार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
– उप महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि MPESB को पहले ही रिजल्ट जारी करने का आदेश मिल चुका है, बावजूद इसके सचिव सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए।
###सरकार की दोहरी नीति: नई परीक्षाएं जारी, लेकिन पुराने छात्रों की अनदेखी क्यों? छात्रों का कहना है कि सरकार ने 2024-25 के लिए नर्सिंग परीक्षा आयोजित कर ली, लेकिन 2022-23 के बैच के रिजल्ट और काउंसलिंग को रोक रखा है।अगर 2024-25 के लिए प्रवेश प्रक्रिया जारी है*, तो फिर 2022-23 के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों?
### सरकारी बहाने और झूठे हलफनामे सरकार ने कोर्ट में अलग-अलग बहाने बनाए और झूठे हलफनामे पेश किए
— 1. **”CBI जांच चल रही है, इसलिए रिजल्ट रोका गया।”** – **सवाल**: जब फर्जीवाड़े की जांच हो रही थी, तो परीक्षा क्यों करवाई गई?
2. **”ग्वालियर खंडपीठ ने स्टे लगाया है।”** – **सच्चाई**: ग्वालियर कोर्ट ने केवल यह पूछा था कि सत्र लेट क्यों हुआ?
3. **”2022-23 का सत्र ज़ीरो ईयर घोषित कर दिया गया है।”** – **सच्चाई**: सरकार ने **गलत हलफनामा पेश कर 2023-24 को 2022-23 बता दिया**।
4. **”ESB ने बिना INC (इंडियन नर्सिंग काउंसिल) की अनुमति के परीक्षा करवाई।”**
– **सवाल**: अगर अनुमति नहीं थी, तो सरकार ने परीक्षा पहले ही क्यों नहीं रोकी?
*छात्रों ने पीएम-राष्ट्रपति तक भेजी शिकायत, लेकिन कोई सुनवाई नहीं छात्रों ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री समेत 15 से अधिक बार शिकायतें भेजीं, लेकिन किसी ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
###छात्रों की चेतावनी: सड़कों पर उतरेगा आंदोलन अगर सरकार अब भी रिजल्ट जारी नहीं करती, तो हजारों नर्सिंग छात्र सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। क्या सरकार छात्रों की आवाज सुनेगी या उन्हें मजबूर करेगी?क्या हाईकोर्ट के आदेशों का सम्मान होगा या फिर सरकार फिर से लापरवाही दिखाएगीअब देखना यह है कि 28 मार्च 2025 की सुनवाई में सरकार क्या कदम उठाती है!