Home AGRICULTURE मार्च में ही अप्रैल जैसी तपिश, छिंदवाड़ा में पारा 37°C के पार

मार्च में ही अप्रैल जैसी तपिश, छिंदवाड़ा में पारा 37°C के पार

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अचानक बढ़ी गर्मी से रवि की फसलों को हो सकता है नुक़सान

सतपुड़ा एक्सप्रेस:( विशेष रिपोर्ट-आलोक सूर्यवंशी) इस साल मार्च की शुरुआत ने ही लोगों को पसीने छुड़ा दिए हैं। ऐसा महसूस हो रहा है मानो मार्च नहीं, बल्कि अप्रैल मई का महीना चल रहा हो। छिंदवाड़ा जिले में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है।

मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में पारा 40 डिग्री के स्तर को छू सकता है।

गर्मी के बढ़ते आंकड़े: एक नज़र में पिछले एक हफ्ते के दौरान छिंदवाड़ा में तापमान में तेजी से उछाल आया है। नीचे दिए गए डेटा से स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है:दिनांक 08 मार्च अधिकतम तापमान 35.5°C न्यूनतम तापमान 17.2°C तेज धूप, 09 मार्च अधिकतम तापमान36.3°C न्यूनतम तापमान 17.7°C उमस और गर्मी 10 मार्च अधिकतम तापमान 37.1°C 18.0°C लू जैसी स्थिति ,11 मार्च (अनुमानित)अधिकतम तापमान 37.5°C – 38°C न्यूनतम तापमान 18.8°C तक रह सकता है

प्रमुख बिंदु: क्यों तप रहा है जिला?

पश्चिमी विक्षोभ का अभाव: इस साल शीतकालीन वर्षा सामान्य से काफी कम रही है, जिसके कारण मिट्टी में नमी खत्म हो गई है और सूरज की किरणें सीधे धरातल को तपा रही हैं।शुष्क हवाएं: राजस्थान और गुजरात की ओर से आ रही गर्म और शुष्क हवाओं ने छिंदवाड़ा सहित पूरे महाकौशल क्षेत्र में गर्मी बढ़ा दी है।

मार्च में मई का एहसास: मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी रफ्तार से बढ़ा, तो मार्च के अंत तक लू (Heatwave) चलने की प्रबल संभावना है और साथ ही बीच माह में हल्के-फुल्के बादल छाने और वारिस की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है जिससे मौसम परिवर्तन से कुछ नमी बढ़ सकती है

स्वास्थ्य संबंधी की चेतावनी

बढ़ते तापमान को अधिकतम तापमान देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।”अचानक बढ़ी इस गर्मी से डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। नागरिक पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और सूती कपड़ों का उपयोग करें।”

जल स्तर में गिरावट:

तेज धूप के कारण जल स्रोतों में पानी कम होने लगा है, जिससे आने वाले दिनों में पेयजल संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

जल ही जीवन है: पानी का दुरुपयोग रोकें

  • तापमान बढ़ने के साथ ही भू-जल स्तर (Groundwater level) तेजी से नीचे जा रहा है। अमरवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में अभी से जल संकट के संकेत मिलने लगे हैं।
  • गाड़ी धोना बंद करें: पाइप लगाकर गाड़ियां धोने और आँगन में पानी छिड़कने से बचें।
  • नल की टोटी ठीक करें: टपकते हुए नलों को तुरंत ठीक करवाएं, क्योंकि एक टपकता नल दिन भर में कई लीटर पानी बर्बाद करता है।
  • कोई वर्तमान स्थिति को देखते हुए पानी का मितव्ययिता से उपयोग करें ताकि आने वाले भीषण गर्मी के महीनों (अप्रैल-जून) के लिए जल संचय किया जा सके।

बेजुबानों पर संकट:

पक्षियों के लिए ‘परिंदा’ अभियान भीषण गर्मी और सूखते जलस्रोतों के कारण सबसे ज्यादा संकट बेजुबान पक्षियों पर पड़ता है।

अपील: सतपुड़ा एक्सप्रेस के माध्यम से नागरिकों से अपील है कि अपने घरों की छतों, बालकनी और आंगन में मिट्टी के पात्रों (सकोरे) में पानी जरूर रखें। चिलचिलाती धूप में पानी की एक-एक बूंद इन पक्षियों का जीवन बचा सकती है। संभव हो तो दाना भी डालें ताकि उन्हें भोजन के लिए दूर न भटकना पड़े।

खेती और बिजली पर दोहरी मार

अमरवाड़ा के ग्रामीण अंचलों में गेहूं की फसल पकने को तैयार है, लेकिन अचानक बढ़ी गर्मी से दाना सिकुड़ने का डर बना हुआ है। वहीं, जिन क्षेत्रों में कृषि कार्य हेतु दोपहर में बिजली मिल रही है बढ़ती गर्मी के कारण दोपहर में सिंचाई से सब्जीवर्गीय फसलों को नुकसान पहुंच रहा है किसानों के द्वारा विद्युत विभाग से यह माँग की गई है की सिंचाई हेतु सुबह से थ्री फेस बिजली प्रदान की जाए

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