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27% ओबीसी आरक्षण पर एकजुट हुए सामाजिक एवं जातीय संगठन, छिंदवाड़ा में बनी आगे की रणनीति

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हाईकोर्ट के फैसले के बाद पिछड़ा वर्ग संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक; सर्वोच्च न्यायालय तक कानूनी लड़ाई और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखने पर जोर

सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 9 अक्टूबर 2026 के निर्णय के बाद पिछड़ा वर्ग के सामाजिक एवं जातीय संगठनों ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में महाजन लॉन छिंदवाड़ा में जिला छिंदवाड़ा में ओबीसी समाज के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में ओबीसी आरक्षण, सामाजिक न्याय, शिक्षा एवं शासकीय सेवाओं में पिछड़ा वर्ग के उचित प्रतिनिधित्व तथा आगामी कानूनी और लोकतांत्रिक रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। उपस्थित प्रतिनिधियों ने एक स्वर में पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का विषय केवल आरक्षण के प्रतिशत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों युवाओं के शैक्षणिक अवसरों, रोजगार में भागीदारी, सामाजिक प्रतिनिधित्व और भविष्य से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण प्रश्न है।

प्रतिनिधियों ने न्यायालय के निर्णय का गहन अध्ययन करने, प्रासंगिक तथ्यों एवं आंकड़ों का संकलन करने, विधि विशेषज्ञों से परामर्श लेने और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।हाईकोर्ट के निर्णय के बाद आरक्षण के मुद्दे पर बढ़ी सक्रियता छिंदवाड़ा मे ओबीसी समाज के जन प्रतिनिधि की हुई महाजन लॉन छिंदवाड़ा में महत्वपूर्ण बैठक मध्यप्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का विषय लंबे समय से न्यायालयीन एवं सामाजिक विमर्श का केंद्र रहा है। 9 अक्टूबर 2026 के न्यायालयीन निर्णय के बाद इस मुद्दे पर पिछड़ा वर्ग के संगठनों की सक्रियता और बढ़ गई है।बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछड़ा वर्ग को न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराने के लिए सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक परिस्थितियों के साथ-साथ शासकीय सेवाओं में उसके प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रासंगिक तथ्यों का समुचित परीक्षण आवश्यक है।संगठनों के प्रतिनिधियों ने राज्य शासन की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों, आंकड़ों और कानूनी पक्ष की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण विषय पर न्यायालय में पक्ष रखते समय प्रामाणिक आंकड़ों, ठोस दस्तावेजों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जानी चाहिए।बैठक में यह भी कहा गया कि न्यायालय के निर्णय का अध्ययन किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय उसके कानूनी आधार, प्रभाव और आगे उपलब्ध विकल्पों का गंभीरतापूर्वक परीक्षण किया जाना चाहिए।

✊ पिछड़ा वर्ग के अधिकारों के लिए सभी संगठन एकजुट होंमहादेव मालवी ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सभी सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक उद्देश्य समाज के उन वर्गों को शिक्षा, रोजगार और विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है, जो ऐतिहासिक रूप से विभिन्न प्रकार की असमानताओं का सामना करते आए हैं। आरक्षण से संबंधित किसी भी निर्णय में संवैधानिक प्रावधानों, सामाजिक परिस्थितियों और वास्तविक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्यों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। महादेव मालवी ने कहा कि अलग-अलग प्रयास करने के बजाय सभी संगठनों को साझा रणनीति बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। आवश्यक आंकड़ों एवं दस्तावेजों का संकलन किया जाए, विधि विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाए और शासन के समक्ष पिछड़ा वर्ग का पक्ष प्रभावी तरीके से रखा जाए।उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर संगठित, तथ्यपरक और समन्वित पहल समय की आवश्यकता है।

सभी संगठनों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए। युवाओं के भविष्य और समान अवसरों से जुड़ा है आरक्षण का प्रश्नराजेश तांत्रिक ने कहा कि ओबीसी आरक्षण का विषय लाखों युवाओं के भविष्य, शिक्षा के अवसरों और रोजगार में भागीदारी से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस विषय पर सभी पक्षों को संवेदनशीलता, गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ विचार करना चाहिए।उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की स्थापना तभी सार्थक होगी, जब समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें। ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए रचनात्मक पहल की आवश्यकता है।राजेश तांत्रिक ने आपसी संवाद, सामाजिक समन्वय और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे का रास्ता तलाशने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों की एकजुटता अधिकारों की रक्षा के प्रयासों को मजबूती प्रदान कर सकती है।

साझा मंच से बुलंद हो पिछड़ा वर्ग की आवाज देवीचंद् सूर्यवंशी ने कहा कि मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रश्न ओबीसी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस विषय पर सभी संगठनों को साझा मंच से अपनी बात प्रभावी ढंग से रखनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आरक्षण से जुड़े कानूनी एवं नीतिगत विषयों पर तथ्यों का संकलन, संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण और प्रभावी कानूनी रणनीति तैयार करना आवश्यक है। समाज के हितों से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग प्रयास करने के बजाय समन्वित पहल की जानी चाहिए। देवीचंद् सूर्यवंशी ने सामाजिक संगठनों से शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा के लिए व्यापक सामाजिक एकजुटता और साझा प्रयास महत्वपूर्ण हैं।

जनजागरण के साथ कानूनी विकल्पों पर हो गंभीर विचार अखिल भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय सचिव एड. देवेंद्र वर्मा ने कहा कि ओबीसी आरक्षण का विषय प्रदेश के विद्यार्थियों, युवाओं, अभ्यर्थियों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसलिए आरक्षण से संबंधित तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।श्री वर्मा ने कहा कि न्यायालय के निर्णय का गंभीरता से अध्ययन करते हुए आगे की कानूनी संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विधि विशेषज्ञों और युवाओं को मिलकर ऐसी रणनीति तैयार करनी चाहिए, जिससे पिछड़ा वर्ग के हितों से जुड़े प्रश्नों को तथ्यों एवं प्रमाणों के आधार पर उचित मंच पर उठाया जा सके।श्री वर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक प्रावधानों और शांतिपूर्ण जनभागीदारी के माध्यम से प्रयास करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित संगठनों से समन्वय के साथ आगे बढ़ने की अपील की।

ओबीसी को न्याय दिलाना सामाजिक न्याय की व्यापक लड़ाई पर केशव साहू ने कहा कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से संबंधित न्यायालयीन निर्णय के बाद प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इस विषय पर सभी सामाजिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों को एकजुट होकर आगे की रणनीति पर विचार करना चाहिए।श्री साहू ने कहा कि ओबीसी वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रामाणिक आंकड़े, तथ्यात्मक तैयारी, संवैधानिक प्रावधानों की स्पष्ट समझ और प्रभावी कानूनी पैरवी आवश्यक है।

हजारी सोनी ने कहा कि राज्य शासन को आरक्षण से जुड़े प्रासंगिक तथ्यों का समुचित परीक्षण कराते हुए न्यायालय में प्रभावी पक्ष रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। यदि निर्णय के विरुद्ध आगे कानूनी कार्यवाही का विकल्प अपनाया जाता है, तो विधि विशेषज्ञों से परामर्श लेकर तथ्यात्मक एवं कानूनी आधार मजबूत करना होगा।मनोज सोनी ने कहा कि ओबीसी वर्ग के युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराना सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना समय की आवश्यकता है।श्री मनोज सोनी जी ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सामाजिक न्याय, समान अवसर और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन ओबीसी वर्ग के हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर संबंधित संगठनों के साथ संवाद, समन्वय और लोकतांत्रिक प्रयासों के माध्यम से अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में एकजुट हों सभी संगठन को मालवी जी ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के समर्थन में एकजुट प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य, शिक्षा में समान अवसर और शासकीय सेवाओं में उचित प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ है।जितेंद्र साहू ने कहा कि पिछड़ा वर्ग को सामाजिक न्याय के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं सामाजिक विषय है। इस मुद्दे पर सभी सामाजिक एवं जातीय संगठनों को एकजुट होकर गंभीरता से प्रयास करने चाहिए, ताकि पिछड़ा वर्ग के हितों से जुड़े प्रश्नों को प्रभावी तरीके से उठाया जा सके।

जितेंद्र साहू ने कहा कि आरक्षण से संबंधित न्यायालयीन निर्णय का गहन अध्ययन करते हुए तथ्यों, आंकड़ों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करना आवश्यक है। शासन, सामाजिक संगठनों और विधि विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद के माध्यम से न्यायसंगत समाधान की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।शिव कुमार चौरिया ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में उचित अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सभी संगठनों को आपसी समन्वय के साथ आगे आना चाहिए। सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए एकजुटता, सकारात्मक पहल और संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत निरंतर प्रयास जरूरी हैं।श्री शिव पटेल ने पिछड़ा वर्ग के अधिकारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सभी संबंधित संगठनों से मिलकर काम करने तथा लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी आवाज बुलंद करने की आवश्यकता पर बल दिया।सर्वोच्च न्यायालय तक कानूनी लड़ाई के विकल्पों पर विचारबैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने उच्च न्यायालय के निर्णय के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए आगे की कानूनी रणनीति पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान कानूनी प्रक्रिया को मजबूत बनाने और सभी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा हुई—- उच्च न्यायालय के निर्णय का विस्तृत विधिक अध्ययन एवं उसके प्रभावों का परीक्षण।- सर्वोच्च न्यायालय में उचित कानूनी कार्यवाही की संभावनाओं पर विचार।- ओबीसी वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक एवं रोजगार संबंधी स्थिति से जुड़े प्रासंगिक आंकड़ों का संकलन।- विधि विशेषज्ञों से परामर्श लेकर तथ्यात्मक एवं संवैधानिक पक्ष को मजबूत करना।- विभिन्न समाज जो ओबीसी समाज के अंर्तगत आने वाले सभी समाज के विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय स्थापित कर साझा रणनीति तैयार करना।- शासन के समक्ष पिछड़ा वर्ग से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना।- शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यमों से जनजागरण और सामाजिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।प्रतिनिधियों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने सहित आगे के कानूनी कदमों पर निर्णय न्यायालय के आदेश, उपलब्ध तथ्यों और विधिक परामर्श के आधार पर लिया जाना चाहिए।

सड़क से न्यायालय तक संवैधानिक संघर्ष जारी रखने पर जोर शेरसिंह मोखल्गाय ने कहा कि बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि पिछड़ा वर्ग के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को केवल न्यायालयीन कार्यवाही तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। कानूनी प्रयासों के साथ-साथ शासन से संवाद, सामाजिक जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।समाज के अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी संबंधित संगठनों, सामाजिक प्रतिनिधियों, युवाओं और आरक्षण समर्थक समूहों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर समन्वित प्रयास करने चाहिए।बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि आगे की गतिविधियां संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित की जाएंगी। किसी भी कानूनी पहल को ठोस तथ्यों, प्रमाणों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो जन आंदोलन भी किया जा सकेगा बैठक का संदेश: एकजुटता, तथ्यात्मक पैरवी और सामाजिक न्यायछिंदवाड़ा में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक का संदेश स्पष्ट रहा कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का प्रश्न प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के युवाओं के भविष्य, शिक्षा एवं रोजगार में अवसरों और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण विषय है।

बैठक में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर आपसी समन्वय बढ़ाने, कानूनी विकल्पों का परीक्षण करने, आवश्यक आंकड़ों एवं दस्तावेजों का संकलन करने तथा संवैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी बात रखने पर जोर दिया।संगठनों की अपेक्षा है कि ओबीसी वर्ग को शिक्षा और शासकीय सेवाओं में न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं तथा आरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं पर तथ्यात्मक एवं संवैधानिक आधार पर गंभीरता से विचार किया जाए।बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता और समन्वय के साथ आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है।

आगामी समय में बड़े स्तर पर पावर मंगल भवन छिंदवाड़ा में बैठक की जाएगी उसके पश्चात ज्ञापन जिला कलेक्टर छिंदवाड़ा के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम सौपा जाएगा सभी का उद्देश्य 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कानूनी विकल्पों और लोकतांत्रिक प्रयासों के माध्यम से आगे की राह तलाशने पर सभी ने जोर दिया।सामाजिक न्याय, समान अवसर और पिछड़ा वर्ग के युवाओं के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रश्न पर संवैधानिक दायरे में रहकर सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प बैठक का प्रमुख संदेश रहा।प्रमुख रूप से उपस्थितजनों में एड. देवेंद्र वर्मा राष्ट्रीय सचिव अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ,केशव साहू कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष तेली समाज ,शिव कुमार चौरिया प्रदेश अध्यक्ष धाकड़ किरार समाज, शिव पटेल प्रदेश संयुक्त सचिव लोधी समाज जिला अध्यक्ष महादेव बारस्कर कुनबी (लोनारे) समाज ,जिला अध्यक्ष मुन्ना पवार, पवार समाज, देवीचंद सूर्यवंशी कलार समाज, जिला अध्यक्ष अलकेश साव तेली समाज , शेरसिंह मोखलगाय रजक समाज जिला अध्यक्ष महादेव मालवी जी व रेखनलाल मालवी धोबी समाज कृष्ण राव सोनी हजारीलाल सोनी जिला सचिव मनोज सोनी महाराष्ट्रीयन स्वर्णकार समाज जितेंद्र साहू सहित पत्रकार राजेश तांत्रिक कुशवाह समाज कु वर्षा सनोड़िया कुर्मी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं पिछड़ा वर्ग के जागरूक नागरिक उपस्थित रहे।

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