सच्चा मुसलमान वो है जिसके हाथ और जुबान से दूसरा इंसान सुरक्षित रहे
रिपोर्ट: आलोक सूर्यवंशी
सतपुड़ा एक्सप्रेस जुन्नारदेव:शहर की मस्जिद ए आयशा में आज एक विशेष धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य विषय “इस्लाम का पैगाम” था। कार्यक्रम में शहर के उलेमा-ए-कराम ने कुरान और हदीस की रोशनी में इस्लाम की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर मुख्य वक्ता के तौर पर *मौलाना मोहम्मद आदिल* और अन्य उलेमाओं ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस्लाम सलामती और अमन का मजहब है। सच्चा मुसलमान वो है जिसके हाथ और जुबान से दूसरा इंसान सुरक्षित रहे।
वक्ताओं ने कुरान की प्रसिद्ध आयत का हवाला देते हुए कहा -> *सूरह मायदा, आयत 32* में अल्लाह फरमाता है – “जिसने किसी एक इंसान की जान बचाई, गोया उसने पूरी इंसानियत की जान बचाई और जिसने किसी एक बेगुनाह इंसान को कत्ल किया, उसने पूरी इंसानियत का कत्ल किया।
“उलेमाओं ने कहा कि आज कुछ संगठन इस्लाम के नाम पर आतंकवाद फैला रहे हैं, उनका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। पहलगाम जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जबरन कलमा पढ़वाना और न पढ़ने पर कत्ल कर देना इस्लाम की तालीम नहीं है।
कुरान स्पष्ट कहता है – “दीन में कोई जबरदस्ती नहीं है।
“पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का उदाहरण देते हुए बताया गया कि मक्का फतह के बाद भी आपने उन लोगों को माफ कर दिया जिन्होंने आप पर जुल्म किए थे, पत्थर बरसाए थे और रास्ते में कचरा फेंका था। यही इस्लाम की असली तालीम है।कार्यक्रम के अंत में सभी ने यह संदेश दिया कि इस्लाम हर तरह के जुल्म, ज्यादती और आतंकवाद का विरोध करता है और उसकी निंदा करता है। इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ने से पहले उसके पैगंबर की शिक्षाओं को पढ़ना और समझना जरूरी है।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।