सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जुन्नारदेव विकासखंड के तेलीबट, रामनगरी, ढाकरवाडी गांवों में योजना के काम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि संबंधित कार्य में 12 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर करीब 4 किलोमीटर ही पाइपलाइन पहुंची है। बताया जा रहा है कि इस कार्य के लिए करीब 24 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि ठेकेदार और संबंधित विभागीय अधिकारियों के बीच मिलीभगत के चलते वास्तविक कार्य से अधिक का भुगतान कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।मामले में परासिया खण्ड के इंजीनियर, एसडीओ और कार्यपालन यंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
मौके पर जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत कार्य और मौके पर किए गए कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए। स्वीकृत डीपीआर, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर और भुगतान रिकॉर्ड की जांच के साथ यदि मौके पर पाइपलाइन की लंबाई का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने दोषियों पर FIR की भी माँग की।
मामला सामने आने के बाद अब सवाल यह है कि जब 12 किलोमीटर पाइपलाइन का भुगतान किया गया तो मौके पर केवल 4 किलोमीटर पाइपलाइन कैसे पहुंची? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठना स्वाभाविक है।फिलहाल पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और स्थल निरीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान के मुकाबले वास्तविक कार्य कितना हुआ और जिम्मेदारी किसकी है।















