वैज्ञानिक सलाह और ड्रिप सिंचाई के साथ अदरक की खेती से कृषक श्री कृपाराम पाठे को हुई 15 लाख की आय सतपुड़ा एक्सप्रेस छिन्दवाड़ा/18 सितंबर 2026/ छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ विकासखण्ड के ग्राम सोनमउ (महलपुर) निवासी कृषक श्री कृपाराम पाठे के लिए उद्यानिकी विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन खेती में बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बना। उपलब्ध भूमि और सिंचाई संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने विभागीय तकनीकी सलाह से अदरक की खेती को अपनाया और कम क्षेत्रफल में उल्लेखनीय उत्पादन एवं आय प्राप्त कर बदलाव की नई कहानी लिखी।

कृषक श्री कृपाराम पाठे के पास कुल 1.800 हेक्टेयर भूमि है। उनके खेत में ड्रिप सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने जुलाई 2025 में लगभग 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की फसल लगाई।तकनीकी मार्गदर्शन से बदला खेती का तरीका – अदरक की फसल लेने से पहले श्री पाठे के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती थी, कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए किस प्रकार ऐसी उद्यानिकी फसल का चयन किया जाए, जिससे उत्पादन के साथ-साथ आय में भी वृद्धि हो। इस दिशा में उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्हें सही फसल प्रबंधन अपनाने में सहायता मिली।
विभागीय तकनीकी सलाह के आधार पर उन्होंने भूमि तैयारी, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फसल उपचार तथा सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। ड्रिप सिंचाई का उपयोग करते हुए फसल की आवश्यकतानुसार सिंचाई प्रबंधन किया। वैज्ञानिक तरीके से किए गए फसल प्रबंधन ने अदरक की फसल को बेहतर तरीके से विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सीमित क्षेत्र में किया निवेश, मिला बेहतर प्रतिफल – कृषक श्री पाठे ने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की फसल के लिए लगभग 36,000 रुपये अदरक बीज पर तथा 24,000 रुपये भूमि तैयारी, खाद, उर्वरक, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स एवं उपचार दवा आदि पर खर्च किए। इस प्रकार उनकी कुल लागत लगभग 60,000 रुपये आई।
लगभग एक वर्ष की मेहनत और तकनीकी प्रबंधन के बाद जुलाई 2026 में उन्होंने अदरक की खुदाई प्रारम्भ की। उन्हें लगभग 250 क्विंटल अदरक का उत्पादन प्राप्त हुआ। मंडी में अदरक का विक्रय लगभग 5,000 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने पर उन्हें लगभग 15 लाख रुपये की कुल आय प्राप्त हुई।
कृषक श्री पाठे के अनुसार, कुल लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 14.50 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।विभागीय मार्गदर्शन बना सफलता का आधार – श्री कृपाराम पाठे बताते हैं कि अदरक की खेती में मिली यह सफलता केवल फसल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यानिकी विभाग से प्राप्त तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन को अपनाने का परिणाम है। विभागीय सलाह से उन्हें फसल के विभिन्न चरणों में आवश्यक प्रबंधन को समझने और उसे खेत में लागू करने में मदद मिली।
अदरक की खेती से प्राप्त आय ने श्री पाठे के खेती के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वे खेती को केवल पारंपरिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि तकनीकी जानकारी, आधुनिक सिंचाई और उपयुक्त उद्यानिकी फसलों के समन्वय से आय बढ़ाने के अवसर के रूप में देखते हैं।















