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उन्नत कृषि महोत्सव: अंतरराष्ट्रीय गेहूं एवं मक्का सुधार केंद्र और बीसा के स्टॉल ने खींचा देशभर के किसानों का ध्यान

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सतपुड़ा एक्सप्रेस रायसेन, मध्य प्रदेश ।रायसेन के दशहरा मैदान में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के *’उन्नत कृषि महोत्सव’* में आधुनिक कृषि तकनीकों का संगम देखने को मिल रहा है। इस महोत्सव में *अंतरराष्ट्रीय गेहूं एवं मक्का सुधार केंद्र’ (CIMMYT)और *बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया’ (BISA) की अपनी नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक परामर्श के कारण किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

*Acasa और Atlas: डिजिटल खेती के नए आयाम**स्टॉल पर पहुंचे किसानों का ध्यान सबसे अधिक **Acasa** और **Atlas** जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने अपनी ओर आकर्षित किया। वैज्ञानिकों ने किसानों को विस्तार से समझाया कि कैसे *Acasa*पोर्टल के माध्यम से वे मौसम की अनिश्चितताओं के बीच खेती से जुड़े सटीक और समयोचित निर्णय ले सकते हैं। साथ ही, Atlas टूल के जरिए मिट्टी के स्वास्थ्य और पोषक तत्वों के डिजिटल प्रबंधन की जानकारी साझा की जा रही है, ताकि किसान वैज्ञानिक तरीके से खाद का उपयोग कर अपनी लागत घटा सकें।

*जलवायु-अनुकूल कृषि (CRA) और फसल विविधीकरण पर जोर*प्रदर्शनी के दौरान संस्थान के विशेषज्ञों ने जलवायु-अनुकूल कृषि’ (CRA) कार्यक्रम की सफलता को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम वर्तमान में मध्य प्रदेश और बिहार के कई जिलों में प्रभावी ढंग से चलाया जा रहा है।इस कार्यक्रम के तहत *फसल विविधीकरण (Crop Diversification)** को प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों को पारंपरिक फसलों के बजाय ऐसी फसलों और किस्मों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है जो कम पानी में तैयार हों और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएं।

विशेषज्ञों ने धान, गेहूं, मक्का और सोयाबीन के साथ-साथ दलहन और तिलहन के समावेश पर जोर दिया, ताकि जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच किसानों की आय सुरक्षित रह सके।

**विशेषज्ञों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा*संस्थान ने अपने स्टॉल पर विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद के जरिए भविष्य की खेती का रोडमैप पेश किया है: *ड्रोन और सेंसर तकनीक:*ड्रोन के माध्यम से रसायनों के सटीक छिड़काव और *ग्रीन सीकर’*(GreenSeeker) जैसे उपकरणों से नाइट्रोजन के संतुलित उपयोग की जानकारी दी जा रही है।

*वैज्ञानिक पद्धतियां:** किसानों को मेढ़ विधि (Bed Planting), जीरो टिलेज, फसल विविधीकरण और फसल अवशेष प्रबंधन की बारीकियों से रूबरू कराया जा रहा है ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।*हरित क्रांति की विरासत से आधुनिक दौर तक**स्टॉल पर जानकारी के दौरान संस्थान के ऐतिहासिक महत्व का भी जिक्र किया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि यह वही संस्थान (CIMMYT) है जिसने विश्व में **हरित क्रांति’* की शुरुआत कर खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया था। आज वही संस्थान अपनी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाते हुए किसानों को डिजिटल, विविधीकृत और स्मार्ट कृषि की ओर ले जा रहा है।

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