*सतपुडा की वादियों में बसता आस्था का धाम, जामसांवली रच रहा नया इतिहास*
*जामसांवली धाम – जहा चमत्कार, श्रद्धा और आधुनिकता का अनूठा संगम*
* सतपुड़ा एक्सप्रेस जामसांवली/सौसर: 31 मार्च 2027*आस्था, विष्वास और भक्ति के केन्द्र के रूप में स्थापित चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर हनुमान लोक जामसांवली धाम निरंतर ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनते जा रहा है। सतपूडा की हरित वादियों के मध्य बसें पांढुर्णा जिले के सौसर तहसील का यह चमत्कारिक जामसांवली धाम देष ही नही, विदेषों तक अपनी ख्याति स्थापित कर चूका है, इसलिये यह रामनवमी से निरंत जारी धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भक्ति के महासागर में परिवर्तित हो रहा है। प्रतिदिन लाखों श्रद्धालू हनुमानजी के दर्षनार्थ आकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते है। मंदिर संस्थान हनुमान जंयती, गुरू पौर्णिमा और नूतन वर्ष के अलावा प्रति मंगलवार, शनिवार को विषेष आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालूओं को हनुमाजी के समक्ष षीष नवाने को मजबूर कर देता है। श्रद्धा का यह प्रवाह लगातार बढता जा रहा है। विगत एक वर्ष में इस हनुमान धाम का स्वरूप निरंतर ऐतिहासिक रूप ले रहा है।
*हनुमान जी का चमत्कारिक इतिहास*जामसांवली धाम का इतिहास अत्यंत प्राचीन और अदभूत माना जाता है, यहा भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी पीपल के वृक्ष के नीचे निद्रा, मुद्रा में विराजमान है। जो देष के अद्वितीय मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि, हजारो वर्ष पूर्व यह विषाल प्रतिमा घास के बीच छिपी हुई थी, जिसे एक किसान ने खेत जोतते समय देखा। इसके बाद यह स्थल श्रद्धा का केन्द्र बन गया। और आज करोडों भक्तों की आस्था का आधार है। वर्ष 1996 में सीमित संसाधनों से प्रांरभ हुआ यह मंदिर आज हनुमान लोक जैसे विशाल धार्मिक परिसर के रूप में विकसित हो रहा है।

मध्यप्रदेस सरकार द्वारा 314 करोड रूपये की लागत से इस परियोजना को आकार दिया जा रहा है। रामनवमी के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के करकमलों से प्रथम चरण का लोकार्पण हो चुका है। वही द्वितीय चरण की भी घोषणा हो चुकी है। पूर्ण होने पर यह धाम महाकाल लोक उज्जैन की तर्ज पर भव्य एवं विष्वस्तरीय धार्मिक केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।
*आस्था और आधुनिकता का अदभूत संगम*मंदिर संस्थान के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि, हनुमान लोक केवल मंदिर विस्तार नही, बल्कि आधुनिक तकनीक और पौराणिक परंपराओं का अनूठा समन्वय है। लगभग 30 एकड क्षेत्र में विकसित यह कॉरिडोर प्रदेष के मुख्य धार्मिक पर्यटन स्थलो में मजबूत पहचान बना रहा है। यहा धार्मिक आस्था के साथ जनभागीदारी और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी व्यापक समावेष देखने को मिल रहा है। श्री शर्मा ने विगत एक वर्ष के विकास कार्यो पर प्रकाश डालते हुये कहा कि, 5 करोड से अधिक लागत से 11 एकड भूमि खरेदी, षासन से प्राप्त 25 एकड भूमि पर बजरंग गौषाला की स्थापना, भव्य सभामंडप का निर्माण, प्रसादम एवं भक्त निवास का जीर्णोद्धार, लिफट, प्रषासनिक भवन, आर ओ पेयजल व्यवस्था, पुजा सामग्री दुकानों का सुव्यवस्थित पुनर्वास, पेवर ब्लॉक, स्ट्रीट लाईट, पार्किक और सोलर प्लांट स्थापना की गई। आज मंदिर संस्थान के पास 68 एकड से अधिक स्वयं की संपत्ति उपलब्ध जो इसे एक विषाल धार्मिक परिसर के रूप मंे विकसित कर रहा है।
*विश्व पटल पर पहचान*जामसांवली धाम अब राष्ट्रीय नही बल्कि वैष्विक पहचान बनाने की दिषा में तेजी से आगे बढ रहा है। सोशल मीडिया और आधुनिक माध्यम के जरिये इसे अंतर्रार्ष्टीय स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। मंदिर संस्थान की हनुमान लोक द्वितीय फेस के आगामी योजनाओं में भव्य गर्भगृह निर्माण, चिंरजीवी पथ, नाला संरक्षण और सौदर्यीकरण, वृहद एसटीपी प्लांट, सोलर विस्तार, मानसिक पुनर्वास केन्द्र जैसे महत्वाकांक्षी प्रकल्प शमिल है। जामसांवली धाम आज केवल एक मंदिर नही बल्कि आस्था, विष्वास और चमत्कार का जीवंत प्रतीक बन चुका है। आनेवाले समय में हनुमान लोक के पूर्ण होने के बाद यह स्थल देष के प्रमुख धार्मिक धामों में अलग पहचान स्थापित करेगा।
*हनुमान जन्मोत्सव भक्ति का महाकुंभ*गत 26 मार्च से जामसांवली धाम में शुरू हुये हनुमान जन्मोत्सव में प्रतिदिन विविध धार्मिक कार्यक्रम सम्पनन हो रहे है। जन्मोत्सव में 2 अप्रेल तक श्रीराम कथा का वाचन पदमविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगदगुरू रामानन्दाचार्य स्वामी श्रीरामभ्रदाचार्य महाराज द्वारा किया जा रहा है। 1 अप्रेल को राम आयेंगे…प्रसिद्ध गीत की प्रस्तुति देनेवाली भजन गायिक स्वस्ति मेहूल द्वारा भजन संध्या की जायेगी। वही 2 अप्रेल की मध्यरात्रि वाराणसी से आये पुरोहितों द्वारा अभिषेक, प्रातः 4 बजे महाआरती होगी। अब तक संम्पन्न कार्यक्रमों में श्रद्धेय विवेक महाराज द्वारा हनुमत चरित्र वाचन, प्रसिद्ध हनुमत कृपापात्र रसराज महाराज की उपस्थिति में ग्यारह हजार श्रद्धालूओं का सामुहिक सुंदर कांठ वाचन किया गया।















