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छिंदवाड़ा नगर निगम टेंडर विवाद में नया मोड़: अर्णव एंटरप्राइजेज के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला, संचालक देवेंद्र धनोरिया बोले- ‘सत्य की जीत हुई’

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सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। नगर निगम छिंदवाड़ा के करीब ₹2 करोड़ 39 लाख के सड़क एवं नाली निर्माण टेंडर को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ सामने आया है। अर्णव एंटरप्राइजेज के संचालक देवेंद्र धनोरिया के अनुसार, इस मामले में हाईकोर्ट ने अर्णव एंटरप्राइजेज के पक्ष में फैसला सुनाया है। धनोरिया ने इसे सत्य की जीत बताते हुए एक इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा लगाए गए आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।‘मेरे पास पर्याप्त काम का अनुभव है’—देवेंद्र धनोरिया

अर्णव एंटरप्राइजेज के संचालक देवेंद्र धनोरिया का कहना है कि एक इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से हाईकोर्ट में यह आपत्ति उठाई गई थी कि अर्णव एंटरप्राइजेज के पास दो-तीन करोड़ रुपये के काम का पर्याप्त अनुभव नहीं है।धनोरिया के मुताबिक, उन्होंने अकेले ही 35-35 करोड़ रुपये तक के कार्य किए हैं। उनका कहना है कि ऐसे में कंपनी के अनुभव को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में एक इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच अब न्यायालय का फैसला अर्णव एंटरप्राइजेज के पक्ष में आया है।

धनोरिया ने कहा कि इससे उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो गई है।एक इंफ्रास्ट्रक्चर की निविदा भी विवाद में धनोरिया का दावा है कि यूनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्वयं टेंडर में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए थे, जिसके चलते उसकी निविदा निरस्त की गई। उनका कहना है कि इसी आधार पर प्रतिद्वंदी कंपनी द्वारा अर्णव एंटरप्राइजेज की पात्रता पर सवाल उठाना उचित नहीं था।हालांकि, टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर ही इन दावों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

पूर्व में उठे थे टेंडर प्रक्रिया पर सवाल,गौरतलब है कि नगर निगम के इस टेंडर को लेकर पहले भी विवाद सामने आया था। याचिकाकर्ता इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से टेंडर प्रक्रिया में अर्णव एंटरप्राइजेज की पात्रता और अनुभव को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी।विवाद के दौरान टेंडर प्रक्रिया, अनुभव प्रमाण-पत्र, ईपीएफ से जुड़े दस्तावेज और अन्य पात्रता शर्तों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

दूसरी फर्म से टेंडर डालने का दावा, जांच का विषय,इसी बीच मामले में एक और जानकारी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि नगर निगम से पूर्व में जुड़े चंदनगांव क्षेत्र के एक भाजपा नेता के भांजे का नाम भी इस टेंडर प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर दूसरी फर्म के नाम से उक्त कार्य के लिए टेंडर दाखिल किया था।हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित व्यक्ति या फर्म की ओर से इस संबंध में कोई पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना उचित होगा।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला मामले का रुख,हाईकोर्ट के कथित फैसले के बाद अब टेंडर विवाद में अर्णव एंटरप्राइजेज का पक्ष भी सामने आया है। कंपनी संचालक देवेंद्र धनोरिया ने अपने ऊपर लगाए गए अनुभव संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि न्यायालय के फैसले से उनकी कंपनी के पक्ष की पुष्टि हुई है।अब पूरे मामले में हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति और टेंडर से जुड़े मूल दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि न्यायालय ने किन आधारों पर क्या आदेश पारित किया और टेंडर प्रक्रिया के कौन-कौन से पहलू न्यायिक परीक्षण के दायरे में रहे।

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