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छिंदवाड़ा में कोल माफिया पर शिकंजा: जुन्नारदेव के दूधपानी में अवैध खनन, कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने दिए जांच के आदेश

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सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। जिले में रेत माफिया के बाद अब कोयला क्षेत्र में सक्रिय कोल माफिया प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। ताजा मामला जुन्नारदेव क्षेत्र के रामपुर स्थित दूधपानी इलाके का है, जहां बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक माह से यहां हजारों टन कोयला मशीनों के जरिए निकाला जा रहा है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आया प्रशासन मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने इसे संज्ञान में लिया और वन विभाग तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए। जिसके बाद देर शाम वन विभाग और राजस्व की संयुक्त टीम दूधपानी पहुंची।अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है और विस्तृत जानकारी नेटवर्क समस्या के कारण देर से उपलब्ध हो पा रही है। हालांकि यह भी चर्चा है कि कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद एसडीएम मौके पर नहीं पहुंचे।

रामपुर दूधपानी में खुलेआम मशीनों से हो रहा खनन स्थानीय लोगों के मुताबिक दूधपानी क्षेत्र की पहाड़ियों और जमीन से भारी मशीनों के जरिए कोयला निकाला जा रहा है। बड़ी मात्रा में निकाला गया कोयला खुले मैदान में जमा किया गया है और उसे दूसरे जिलों में भेजने की तैयारी की जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध खनन से शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो सकता है। शिकायतों के बावजूद पुलिस और संबंधित विभागों की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन और पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल सूत्रों का दावा है कि स्थानीय अधिकारियों को अवैध खनन की जानकारी है, लेकिन अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। क्षेत्र में मजदूरों की आवाजाही और मशीनों की मौजूदगी खुली गतिविधि की ओर इशारा करती है।कुछ ग्रामीणों का कहना है कि एक बार अधिकारी मौके पर पहुंचे भी थे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ खास नहीं हो सका।

राजनीतिक संरक्षण की आशंका सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में सत्ता और विपक्ष के कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि दूसरे जिले के एक प्रभावशाली नेता के करीबी लोगों ने यहां जमीन खरीदी है और कोयला मिलने के बाद अवैध खनन शुरू कर दिया गया।हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की जानकारी भोपाल से लेकर दिल्ली तक पहुंचने की चर्चा है। संभावना जताई जा रही है कि उच्च स्तर से कभी भी गोपनीय जांच या छापामार कार्रवाई हो सकती है।

सरकार को करोड़ों का नुकसान संभव यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो अवैध खनन से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान होगा, बल्कि शासन को भी करोड़ों रुपए के राजस्व की क्षति उठानी पड़ सकती है।फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने स्पष्ट किया है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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