जांच प्रतिवेदन के आधार पर वरिष्ठ चिकित्सक के विरुद्ध कार्यवाही प्रस्तावित,रेजिडेंट चिकित्सक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव,नर्सिंग अधिकारियों के विरुद्ध वेतनवृद्धि रोके जाने के आदेश,दो चिकित्सकों के विरुद्ध वेतन कटौती के निर्देश,ड्यूटी व्यवस्था एवं एसओपी पालन सुदृढ़ करने के निर्देश जारी
सतपुड़ा एक्सप्रेस छिन्दवाड़ा// जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में दिनांक 11 जनवरी 2026 को उपचार के दौरान मेडिकल वार्ड में भर्ती दो मरीज — चैतू धुर्वे एवं इंद्रा बाई पति सूरजलाल — की मृत्यु के प्रकरण में गठित जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है। घटना की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा द्वारा वरिष्ठ चिकित्सकों का जांच दल गठित किया गया था, जिसने दिनांक 13 जनवरी 2026 को विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उक्त प्रतिवेदन का परीक्षण कलेक्टर हरेंद्र नारायन द्वारा किया गया।
जांच प्रतिवेदन के प्रमुख तथ्य– जांच प्रतिवेदन में यह तथ्य प्रकाश में आया कि रात्रिकालीन एवं आपातकालीन समय में चिकित्सकीय ड्यूटी व्यवस्था, ऑन-कॉल प्रणाली, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के पालन तथा विशेषज्ञ चिकित्सकीय समन्वय में अपेक्षित स्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो सकी, जिसके कारण मरीजों को समय पर आवश्यक विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध नहीं हो पाया।
वरिष्ठ चिकित्सक के विरुद्ध कार्यवाही प्रस्ताव- डॉ.एम.पी. यादव, वरिष्ठ चिकित्सक एवं मेडिसिन विशेषज्ञ (ऑन-कॉल) द्वारा ड्यूटी रोस्टर के अनुरूप उपचार व्यवस्था में समन्वय सुनिश्चित नहीं किया गया। जांच प्रतिवेदन के अनुसार विशेषज्ञ स्तर के उपचार में विलंब की स्थिति निर्मित हुई।उक्त कृत्य को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत मानते हुए कलेक्टर श्री नारायन द्वारा उनके विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-10 के अंतर्गत एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोके जाने का प्रस्ताव आयुक्त, जबलपुर संभाग को प्रेषित किया गया है।
रेजिडेंट चिकित्सक के विरुद्ध अनुशासनात्मक प्रस्ताव- डॉ. योगेन्द्र राहंगडाले, डीआरपी रेजिडेंट (मेडिसिन) द्वारा आईसीयू एवं इमरजेंसी में मरीजों की गंभीर स्थिति की सूचना प्राप्त होने के बावजूद समय पर उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई। जांच के दौरान उनके द्वारा दिए गए कथन में उक्त त्रुटि स्वीकार की गई है। जांच दल प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर श्री नारायन द्वारा उनके विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1906 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की गई है, जिसके संबंध में संबंधित मेडिकल कॉलेज रतलाम को पत्र प्रेषित किया गया है।
नर्सिंग अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक आदेश-जांच में यह पाया गया कि नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती दुर्गा नागवंशी द्वारा मरीज की स्थिति गंभीर होने के बावजूद SOP अनुसार संबंधित चिकित्सकों को समय पर सूचित नहीं किया गया। नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती अर्चना डहेरिया द्वारा आईसीयू में भर्ती पश्चात ऑन-कॉल विशेषज्ञ चिकित्सक को आवश्यक सूचना नहीं दी गई। उक्त तथ्यों के आधार पर कलेक्टर श्री नारायन द्वारा दोनों नर्सिंग अधिकारियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1908 के नियम-10 के अंतर्गत प्रत्येक की एक-एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोके जाने का आदेश जारी किया गया है। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए निर्देशित किया गया है।
दो चिकित्सकों के वेतन कटौती संबंधी निर्देश- जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेखित है कि डॉ. पंकज मिश्रा, चिकित्सा अधिकारी (फ्लोर ड्यूटी) निर्धारित रात्रि ड्यूटी अवधि में वार्ड में उपस्थित नहीं पाए गए। साथ ही डॉ. फहीम खान, आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी द्वारा मरीज की गंभीर स्थिति के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण एवं निगरानी सुनिश्चित नहीं की गई। उक्त आधार पर दोनों चिकित्सकों के 15-15 दिवस के वेतन कटौती की कार्यवाही नियमानुसार किए जाने के निर्देश प्रदान किए गए हैं।















