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TET शिक्षक पात्रता परीक्षा का विरोध,म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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**ज्ञापन कार्यक्रम में समस्त शिक्षक संगठन हुए शामिल*

*म.प्र.राज्य कर्मचारी संघ सहित समस्त शिक्षक संगठनों ने पात्रता परीक्षा का किया विरोध*

*शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में सभी शिक्षक संगठन हुए एकजुट*

*30 वर्ष की सेवा के पश्चात 57 वर्ष की आयु में शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का आदेश असंवैधानिक है*

सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा।मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर संपूर्ण जिले सहित छिंदवाड़ा में भी (टीईटी) शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में कलेक्टर महोदय के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री महोदय एवं मुख्य सचिव महोदय मध्य प्रदेश शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष सतीश गोंडाने,जिला अध्यक्ष रमेश शर्मा, एवं जिला सचिव अरविंद भट्ट ने जिले के समस्त प्रभावित शिक्षक, गुरुजी,संविदा शिक्षक,अध्यापक,प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षक,अनुकंपा से नियुक्त शिक्षक के लिए जिले में कार्यरत समस्त शैक्षिक संगठन मध्य प्रदेश शिक्षक संघ,राज्य शिक्षक संघ,प्रांतीय शिक्षक संघ, आजाद अध्यापक संघ,आजाद अध्यापक परिषद,अध्यापक संघर्ष समिति सहित समस्त संगठनों की ओर से कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी राजपत्र तथा समय प्रभावी नियमों के आधार पर विधिवत रूप से की गई है अतः उन शिक्षकों के लिए बाद में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य कर देना तथा 2 वर्ष के भीतर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण न करने की स्थिति में सेवा समाप्ति जैसा कठोर प्रावधान लागू करना न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है ज्ञापन में यह भी बताया गया कि शिक्षक वर्षों से निष्ठा एवं समर्पण के साथ विद्यार्थियों को शिक्षित करने हेतु शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

अधिकांश शिक्षक ऐसे भी हैं जिनकी उम्र लगभग 55 से 57 वर्ष और सेवाएं 28 से 30 वर्ष हो चुकी है उनके अनुभव और वरिष्ठता को दरकिनार कर शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए बाध्य किया जाना अमानवीय एवं असंवैधानिक है दीर्घकालीन रूप से शिक्षकों की सेवा को केवल पात्रता परीक्षा के आधार पर समाप्त करने का प्रावधान शिक्षकों के भविष्य को असुरक्षित करता है बल्कि इससे उनके परिवारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। शिक्षक डर एवं भय की मनोदशा में वर्तमान में परीक्षा एवं मूल्यांकन कार्यों का दायित्व निर्वहन कर रहा है यहां यह भी विचारणीय है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय 21 अक्टूबर 1997 के अनुसार हुई है उनके लिए बाद में नवीन शर्तों को लागू करना न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता समस्त शिक्षक संगठनों ने मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री माननीय मोहन यादव से निवेदन किया है कि मध्य प्रदेश सरकार इस विषय में शिक्षकों के प्रति संवेदनशीलता के साथ माननीय सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दायर कर शिक्षकों का पक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने की कृपा करें तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)की अनिवार्यता समाप्त करते हुए अथवा पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इससे पूर्णता मुक्त करने के संबंध में सकारात्मक एवं न्यायोचित निर्णय लेने की कृपा करें।

आज ज्ञापन कार्यक्रम में जिले के सैकड़ो अध्यापकों ने अपनी जागरूकता को प्रदर्शित करते हुए अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की विभिन्न संगठनों में मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ से सतीश गोंडाने,रमेश शर्मा, डॉ एम के मौर्य,अरविंद भट्ट, शेखर पांडे,ताराचंद भलावी, राकेश चौरसिया, जितेश राय, जितेंद्र मोहिते , आकाश पवार, कमलेश धाकड़ , कुलदीप मोखलगाय,विकास शर्मा , संजय राज , धीरेंद्र राउत, विनोद हेडाऊ मध्य प्रदेश शिक्षक संघ से प्रदीप सूर्यवंशी,वीरेंद्र शर्मा,महेश भादे, राज्य शिक्षक संघ से श्रीमती किरण शर्मा,मध्य प्रदेश शिक्षक संघ से राजिक कुरैशी, ट्राईबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन से सजीर कादरी, देवराव पवार,राजेंद्र करमेले,आजाद अध्यापक संघ से राजेश जैन,आजाद अध्यापक परिषद से हीरालाल चौरे, सहित सुशील दोईजड़, रामाजी पाठे,संतोष डोंगरे,संजय मतकर, चतुर्थ श्रेणी अध्यक्ष संजय डेहरिया अनेक अध्यापकों ने अपने ऊपर थोपे गए अमानवीय एवं असंवैधानिक आदेश का विरोध करते हुए अपनी शासकीय सेवा को सुरक्षित रखने हेतु न्याय के लिए गुहार लगाई।

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