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PMGSY की जीएम कविता पटवा की हठधर्मिता, हाईकोर्ट में दायर कराई कैविएट ?

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अनुमति से पहले ही दायर हुई याचिका, 11 स्थानांतरित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल

सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा।प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की जनरल मैनेजर (जीएम) कविता पटवा की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों में आ गई है। छिंदवाड़ा इकाई से स्थानांतरित किए गए 11 कर्मचारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में कैविएट दायर कराई गई है, जिसमें प्यून और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि पांढुर्णा के नया जिला बनने के बाद PMGSY की इकाई-2 को पांढुर्णा स्थानांतरित किया गया था, वहीं छिंदवाड़ा की दोनों इकाइयों का युक्तियुक्त कारण (Rationalisation) किया गया।लेकिन आरोप है कि पूर्व में साठगांठ के चलते छिंदवाड़ा इकाई के कुछ कर्मचारियों को पांढुर्णा स्थानांतरित कर दिया गया।

इन 11 कर्मचारियों में से एक देवेन्द्र दुबे सहायक ग्रेड 2 के पद पर कलेक्टर दर पर सेवा निवृति के बाद piu 1 छिंदवाड़ा में पदस्थ थे जिनका भी स्थानांतरण पांढुर्णा कर दिया गया जबकि शासन का कोई नियम कलेक्टर दर पर कार्यरत कर्मचारी अन्य जिले में स्थानांतरण का नहीं है और इनके खिलाफ कैविएट दायर कराई गई जो कि शासन की राशि का दुरुप्रयोग है इसी तरह 4 संविदा पर पदस्थ प्यून है जिनका भी स्थानांतरण किया गया और कैविएट दायर कराई गई जो कि शासन की राशि का दुरुप्रयोग है

पहले कर्मचारियों को मिली कोर्ट से राहत इस स्थानांतरण के खिलाफ कुछ कर्मचारियों ने न्यायालय की शरण ली थी, जिन्हें हाईकोर्ट से राहत भी मिली। अब आशंका जताई जा रही थी कि अन्य प्रभावित कर्मचारी भी न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

कर्मचारियों को कोर्ट जाने से रोकने की कोशिश?इसी क्रम में जीएम कविता पटवा द्वारा हाईकोर्ट में कैविएट दायर कराई गई, ताकि बिना पक्ष सुने किसी कर्मचारी को राहत न मिल सके।हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी सामने आई है।

अनुमति से पहले ही दायर कर दी कैविएट

सतपुड़ा एक्सप्रेस की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि—जीएम कविता पटवा ने 08 अक्टूबर 2025 को भोपाल मुख्यालय को कैविएट दायर करने की अनुमति के लिए पत्र लिखा

भोपाल मुख्यालय से 31 अक्टूबर 2025 को अनुमति पूर्व प्रभाव से प्रदान की गई

लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि17 अक्टूबर 2025 को ही हाईकोर्ट में कैविएट याचिका दायर कर दी गई,यानी अनुमति मिलने से पहले ही न्यायालय में याचिका दाखिल करवा दी गई

प्रशासनिक नियमों पर उठे सवाल अनुमति के पूर्व की गई यह कार्रवाई अब विभागीय और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सवाल यह उठ रहा है कि—क्या बिना सक्षम अनुमति के न्यायालयीन प्रक्रिया अपनाना वैध है ? क्या यह कार्रवाई कर्मचारियों को न्यायालय जाने से रोकने के उद्देश्य से की गई ? क्या यह शासकीय धन का दुरुपयोग नहीं है? फिलहाल, पूरा मामला PMGSY और ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

निम्न कर्मचारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में कैविएट दायर कराई गई

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