सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा ।जिले में परिवहन विभाग की लापरवाही और मिलीभगत के चलते राज्य शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुँचाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। सूत्र बताते हैं कि पवार ऑटोडील द्वारा दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में पंजीकृत सैकड़ों वाहन बिना मध्यप्रदेश में रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स चुकाए जिले में बेचे जा रहे हैं जो जिले की सड़कों पर स्थाई रूप से चलाए जा रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, पवार ऑटोडील अन्य राज्यों से नए व सेकंड हैंड वाहन कम कीमत पर खरीदकर उन्हें बिना वैध पंजीकरण के छिंदवाड़ा में बेच रहा है। यह न केवल राज्य सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। ऐसे वाहनों की पहचान और ट्रैकिंग मुश्किल होने से अपराध की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
आरटीओ और एजेंटों की भूमिका संदिग्ध इस पूरे मामले में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) एवं संबंधित एजेंटों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण जिले में बाहरी राज्यों के पंजीकृत वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।जानकारी के अनुसार, आरटीओ अनुराग शुक्ला को मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। आरटीओ विभाग द्वारा जिले में चल रहे अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों की कोई जांच नहीं की जा रही है।
यार्ड में खड़ी 40 गाड़ियाँ, कोई रिकॉर्ड नहीं सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पवार ऑटोडील के यार्ड में खड़ी करीब 40 गाड़ियों का कोई भी रिकॉर्ड मध्यप्रदेश आरटीओ के पास उपलब्ध नहीं है। सूत्रों की माने तोह ये सभी वाहन अन्य राज्यों से बिना NOC के लाये जाते है। जैसे ही इन गाड़ियों का सौदा होता है फिर इनकी NOC बुलाई जाती। यदि इसी दौरान कोई हादसा होता या अपराध होता है तोह इनका जिम्मेदार कौन होगा। इन वाहनों से बाकायदा ग्राहकों को ट्रायल दिया जा रहा है। यदि इनमें से किसी वाहन से दुर्घटना या आपराधिक घटना होती है, तो पुलिस के लिए वाहन तक पहुँचना बेहद कठिन हो सकता है। आरटीओ की सुस्त कार्यप्रणाली किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
सेकंड हैंड वाहनों का अवैध कारोबार दिल्ली, हरियाणा और गुजरात से बड़ी संख्या में सेकंड हैंड कारें लाकर छिंदवाड़ा में बेची जा रही हैं।सूत्रों की माने तो नागपुर रोड स्थित पवार ऑटोडील ने न तो ऑटोडील का वैध पंजीकरण कराया है और न ही वाहनों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, बिना रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन के वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं।स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो केवल छिंदवाड़ा जिले से ही शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान लगातार होता रहेगा। इस मामले में आरटीओ अनुराग शुक्ला से बात करने के लिए संपर्क किया गया पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।















