Home CITY NEWS बस्तियों के बाहर की शराब दुकानें क्यों लाई जा रही हैं अंदर?

बस्तियों के बाहर की शराब दुकानें क्यों लाई जा रही हैं अंदर?

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रामाकोना और मोहगांव में विरोध तेज, ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन

सतपुड़ा एक्सप्रेस पांढुर्णा / सौंसर । शासन की स्पष्ट नीति है कि शासकीय शराब दुकानें आबादी क्षेत्र से बाहर संचालित की जाएं, ताकि सामाजिक वातावरण प्रभावित न हो। इसके बावजूद नवगठित पांढुर्णा जिले में कई स्थानों पर इसके विपरीत स्थिति सामने आ रही है। जहां एक ओर बस्तियों के बाहर संचालित दुकानों को रिहायशी क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर अवैध रूप से होटल, ढाबों और अन्य ठिकानों से शराब बिक्री भी जारी है।जिले में इस प्रकार की गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कुछ माह पूर्व जिला मुख्यालय में एसपी कार्यालय के पास शुक्रवार बाजार चौक पर शराब दुकान खोलने की तैयारी की गई थी, जिसका स्थानीय नागरिकों ने जोरदार विरोध किया। विरोध के बाद दुकान को पुनः भोपाल रोड पर स्थानांतरित करना पड़ा। इसके अलावा तिगांव, सिराठा, अंबाडा, पंधराखेड़ी सहित कई स्थानों पर आज भी बस्तियों के भीतर शराब बिक्री को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगह दिखावे के लिए दुकानों को बाहर शिफ्ट किया गया, लेकिन पुरानी जगहों से अवैध बिक्री जारी है। साथ ही अहातों का खुलेआम संचालन, रेट लिस्ट के बिना ओवररेटिंग और स्थानीय निकायों से विधिवत एनओसी न लेने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं।रामाकोना में नई दुकान का विरोधरामाकोना के वार्ड क्रमांक 17 में निर्माणाधीन शराब दुकान को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। वार्डवासियों ने तहसील कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य तत्काल रोकने और दुकान को पूर्ववत स्थान पर ही संचालित रखने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित स्थल घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां धार्मिक स्थल और शैक्षणिक संस्थाएं भी स्थित हैं। ऐसे में यहां शराब दुकान खुलने से सामाजिक वातावरण प्रभावित होगा। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।मोहगांव में भी बढ़ा विरोधमोहगांव में सिंगपुर-मोहगांव तिराहे पर प्रस्तावित शराब दुकान को लेकर भी विरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना आवश्यक अनुमति के निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे लगभग 25 हजार की आबादी प्रभावित हो सकती है। बताया जा रहा है कि पहले यह दुकान करीब एक किलोमीटर दूर संचालित हो रही थी, जिसे अब रिहायशी क्षेत्र के समीप लाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रस्तावित स्थल के पास नहर और जलापूर्ति का पंप हाउस स्थित है, जिससे हजारों लोगों को पानी मिलता है। नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के लिए रातों-रात मुरम डालकर जमीन समतल की गई है और संबंधित विभागों से अनुमति नहीं ली गई। साथ ही यहां से स्कूली छात्र-छात्राओं का आवागमन होता है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।पहले भी हो चुके हैं आंदोलनशराब दुकानों के विरोध में पूर्व में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा आंदोलन किए जा चुके हैं। इनमें दुकान बंदी, धरना, ज्ञापन और सांकेतिक विरोध जैसे कदम शामिल रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए आगामी समय में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। रामाकोना और मोहगांव के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए, नियमों के तहत जांच की जाए और जनहित को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।

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