सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। जिले में ऑटोडील के नाम पर राज्य सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुँचाया जा रहा है। दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में पंजीकृत सैकड़ों वाहन बिना मध्यप्रदेश में रजिस्ट्रेशन और टैक्स चुकाए जिले की सड़कों पर स्थाई रूप से चल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुछ ऑटोडील संचालक अन्य राज्यों से नए और पुराने वाहन खरीदकर उन्हें मध्यप्रदेश में बिना पंजीकरण और रोड टैक्स के बेच रहे हैं। यह न केवल राज्य के राजस्व को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि अपराध की संभावनाओं को भी बढ़ावा दे रहा है, क्योंकि ऐसे वाहनों की पहचान और ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।
इस पूरे मामले में आरटीओ एजेंटों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि फर्जी पतों के आधार पर वाहनों का ट्रांसफर कराया जा रहा है, जिससे नियमों को दरकिनार किया जा सके। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण जिले में बाहरी राज्यों के पंजीकृत वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
सेकंड हैंड वाहनों का बड़ा अवैध कारोबार दिल्ली, हरियाणा और गुजरात से कम कीमत पर सेकंड हैंड कारें खरीदकर छिंदवाड़ा में बेची जा रही हैं। सूत्रों की मानें तो नागपुर रोड स्थित एक बड़ा ऑटोडील संचालक इन राज्यों से वाहनों की बल्क खरीद कर जिले में उतार रहा है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित ऑटोडील संचालक के पास न तो ऑटोडील का वैध पंजीकरण है और न ही वाहनों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज।यदि आरटीओ द्वारा जांच की जाए, तो यार्ड में खड़ी लगभग 90 प्रतिशत गाड़ियाँ अन्य राज्यों की पंजीकृत पाई जा सकती हैं। इन वाहनों की जानकारी न तो आरटीओ को दी गई है और न ही मध्यप्रदेश का रोड टैक्स जमा किया गया है। इसके बावजूद, वाहनों को जिले की सड़कों पर बेधड़क चलाया जा रहा है।
क्या कहते हैं नियम परिवहन नियमों के अनुसार, यदि कोई वाहन अन्य राज्य से लाकर मध्यप्रदेश में स्थाई रूप से उपयोग किया जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से:
1. संबंधित राज्य से एनओसी प्राप्त करनी होती है
2. मध्यप्रदेश में रोड टैक्स जमा करना होता है
3. आरटीओ द्वारा वाहन का निरीक्षण कराना होता है
4. मध्यप्रदेश में वाहन का पंजीकरण (आरसी) कराना होता है
5. ऑटोडील संचालक का वैध पंजीकरण प्रस्तुत करना होता है
सूत्रों का कहना है कि शहर में गिने-चुने ऑटोडीलरों को छोड़कर अधिकांश के पास ऑटोडील का पंजीकरण ही उपलब्ध नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कितने वाहन वास्तव में मध्यप्रदेश आरटीओ में रजिस्टर्ड हो रहे हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि परिवहन विभाग इस अवैध कारोबार पर कब और कैसे कार्रवाई करेगा, और राज्य के राजस्व को हो रहे नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी।














