Home CITY NEWS यूनिफार्म सिविल कोड/UCC से मुस्लिम महिलाओं को मिलेंगे पुरुषों के बराबर अधिकार

यूनिफार्म सिविल कोड/UCC से मुस्लिम महिलाओं को मिलेंगे पुरुषों के बराबर अधिकार

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सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा -: मध्यपदेश सरकार आने वाले विधानसभा सत्र में यूनिफॉर्म सविल कोड (UCC) को कानून का रूप देने वली है। जिसके लिए लोगों से सुझाव भी आमंत्रित किया जा चुके हैं। इन सुझाओं में महिलाओं ने अपनी सक्रिय भगीदारी निभाई हैं।यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर मुस्लिम पसमांदा के जिला अध्यक्ष आरिफ शाह ने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य समान नागरिक कानून सबको बराबर का अधिकार दिलाने का प्रयास है। आगे उन्होंने कहा कि सभी धर्म, जाति, संस्कृति के नियमों को ध्यान में रखते हुए हर समाज के प्रमुख लोगों से संवाद करने के बाद युसीसी कानून को लाया जाए तो बेहतर होगा। इस कानून को लेकर मुस्लिम महिलाए भी उत्साहित हैं और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही हैं। यूनिफॉर्म सविल कोड (UCC) से मुस्लिम महिलाओं को विवाह, तलाक, भरण-पोषण और संपत्ति के मामलों में अधिक समान और मजबूत कानूनी अधिकार मिल सकते हैं।।

विवाह और तलाक में समान अधिकार पति और पत्नी दोनों के लिए एक जैसे कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां तय हो सकती हैं। तलाक की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और न्यायिक निगरानी में हो सकती है। भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का बेहतर संरक्षण तलाकशुदा या परित्यक्त महिला को भरण-पोषण के लिए समान कानूनी अधिकार मिल सकते हैं। जिससे आर्थिक सुरक्षा बढ़ सकती है। उक्त विचार लॉ कालेज की विधि स्टूडेंट तबस्सुम निशा ने व्यक्त करते हुए कहा किसंपत्ति और उत्तराधिकार में अधिक समानता में UCC नियम लागू करता है, तो महिलाओं को संपत्ति में पुरुषों के बराबर अधिकार मिल सकते हैं। आगे उन्होंने कहा कि बाल विवाह और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर सभी समुदायों पर समान विवाह संबंधी नियम लागू होने से महिलाओं के अधिकार अधिक सुरक्षित होंगे। वहीं दूसरी ओर कानूनी प्रक्रिया सरल होगी।

अलग-अलग पर्सनल लॉ के बजाय एक समान कानून होने से न्यायिक प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हो सकती है। सभी नागरिकों के लिए एक समय में केवल एक ही वैध विवाह मान्य होगा। पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर दूसरी शादी अवैध मानी जा सकती है और पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पहली पत्नी अपने वैवाहिक अधिकार, भरण-पोषण, रहने का अधिकार और अन्य कानूनी राहत आसानी से प्राप्त कर सकती है। यदि पति पत्नी को छोड़ देता है, तो पत्नी अदालत से अपने और बच्चों के भरण-पोषण की मांग कर सकती है।

UCC से पत्नी और बच्चों के संपत्ति संबंधी अधिकार अधिक स्पष्ट और सुरक्षित हो सकते हैं। इसके अलावा पति केवल पत्नी को छोड़कर या मौखिक घोषणा करके विवाह समाप्त नहीं कर सकेगा। तलाक कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होगा। हालांकि भारत में मुस्लिम महिलाओं के लिए तत्काल तीन तलाक पहले ही कानून द्वारा अमान्य किया जा चुका है।यदि UCC में एक-विवाह और समान वैवाहिक अधिकारों के प्रावधान शामिल होते हैं, तो बिना तलाक दिए पत्नी को छोड़कर दूसरी शादी करने जैसी परिस्थितियों में पहली पत्नी को अधिक मजबूत कानूनी संरक्षण और न्याय पाने में सुविधा मिल सकती है। मुस्लिम महिलाओं को इस ओर गहनता से अपने अधिकार के प्रति ध्यान देना होगा। महिलाएं अपनी हक की ओर ध्यान दें। किसी के दबाओ में आकर अपनी ज़िन्दगी का फैसला न करें। ताकि भविष्य में कभी आपके साथ दूसरे विवाह या संपत्ति को लेकर विवाद न आए।

मध्यप्रदेश में यूसीसी को लेकर अंतिम कानूनी प्रावधान विधेयक के पारित होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। ऊपर व्यक्त विचार संबंधित व्यक्तियों के हैं और संभावित प्रभावों के संदर्भ में दिए गए हैं।

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