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समर्थन मूल्य पर खरीदी से पहले फिर सक्रिय हुआ मूंग गिरदावरी सिंडिकेट! तामिया-चौरई में सबसे अधिक रकबे ने खड़े किए सवाल ?

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सतपुड़ा एक्सप्रेस, छिंदवाड़ा। जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग और उड़द की खरीदी शुरू होने से पहले एक बार फिर कथित मूंग गिरदावरी सिंडिकेट की सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ बिचौलिए गिरदावरी के आधार पर समर्थन मूल्य का लाभ लेने के लिए कथित तौर पर “60-40” के फार्मूले पर काम कर रहे हैं।

पिछले वर्ष अमरवाड़ा क्षेत्र में ऐसे मामलों को सतपुड़ा एक्सप्रेस ने प्रमुखता से उजागर किया था, जिसके बाद प्रशासन की सख्ती के चलते वहां मूंग की गिरदावरी घटकर करीब 402 हेक्टेयर रह गई। अब किसानों का दावा है कि सिंडिकेट की गतिविधियां तामिया और चौरई क्षेत्र की ओर बढ़ गई हैं।

राजस्व विभाग के अनुसार जिले में इस वर्ष 15,553 एकड़ (6453.396 हेक्टेयर) में दलहनी फसलों की गिरदावरी दर्ज की गई है। इसमें 14,384 एकड़ (5967.374 हेक्टेयर) में मूंग तथा 1120.48 एकड़ (457.339 हेक्टेयर) में उड़द का रकबा शामिल है।

मूंग गिरदावरी (हेक्टेयर) : सबसे अधिक से सबसे कमक्रम तहसील मूंग (हेक्टेयर)1 तामिया 1805.6402 चौरई 1779.4233 चांद 747.3434 छिंदवाड़ा 673.2715 अमरवाड़ा 402.7576 मोहखेड़ 295.0587 हर्रई 227.2238 बिछुआ 166.1199 उमरेठ 88.14110 छिंदवाड़ा नगर 23.22411 परासिया 12.80812 जुन्नारदेव 7.343

उड़द गिरदावरी (हेक्टेयर)तहसील उड़द (हेक्टेयर)चौरई 264.657हर्रई 65.232छिंदवाड़ा 33.327अमरवाड़ा 27.444मोहखेड़ 18.855बिछुआ 17.245उमरेठ 15.461चांद 10.177परासिया 6.017तामिया 4.028जुन्नारदेव 1.214

तहसीलवार आंकड़ों में सबसे बड़ा सवाल तामिया और चौरई को लेकर उठ रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई के साधन सीमित हैं और वर्षा पर अधिक निर्भरता रहती है, वहां सबसे अधिक मूंग गिरदावरी दर्ज होना जांच का विषय है। किसानों का आरोप है कि यदि गिरदावरी का और उसके हिसाब से हुए पंजीयन का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ तो समर्थन मूल्य का लाभ वास्तविक किसानों के बजाय बिचौलियों तक पहुँचेगा।

किसानों ने मांग की है कि राजस्व विभाग, कृषि विभाग और खरीदी एजेंसियां संयुक्त रूप से गिरदावरी का और उसके हिसाब से हुए पंजीयन का और वास्तविक किसान के यहां फसल विक्रय के लिए उपलब्ध है कि नहीं इस बात का सत्यापन कराएं तथा संदिग्ध मामलों की निष्पक्ष जांच करें, ताकि शासन की समर्थन मूल्य योजना का लाभ केवल पात्र किसानों को ही मिले।(नोट: कथित सिंडिकेट, 60-40 व्यवस्था और अनियमितताओं के संबंध में लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।)

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