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वृद्ध माता-पिता का भरण-पोषण नहीं करना पड़ा भारी, 13 वर्ष पुराना बंटवारा आदेश निरस्त

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सतपुड़ा एक्सप्रेस अमरवाड़ा: वृद्ध माता-पिता की उपेक्षा कर उनका भरण-पोषण नहीं करने वाले पुत्रों के विरुद्ध न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए 13 वर्ष पूर्व किया गया बंटवारा निरस्त कर कृषि भूमि पुनः पिता के नाम करने का आदेश दिया है।

मामला ग्राम मानेगांव निवासी 76 वर्षीय एवं 66 वर्षीय वृद्ध पति पत्नी का है। वृद्ध दंपति ने न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी अमरवाड़ा के समक्ष वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम की धारा 5, 9, 11, 12 एवं 23 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया था।

आवेदकों ने न्यायालय को बताया कि उन्होंने अपने दोनों पुत्रों को वर्ष 2013 में पारिवारिक बंटवारे के तहत अपनी कृषि भूमि प्रदान की थी। बंटवारा आदेश दिनांक 31/08/2013 के आधार पर भूमि पुत्रों के नाम दर्ज हो गई थी। लेकिन भूमि प्राप्त करने के बाद दोनों पुत्रों ने वृद्ध माता-पिता की देखभाल करना बंद कर दिया तथा उनके भरण-पोषण, उपचार एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति से भी इंकार कर दिया।

वृद्धावस्था में जीवन-यापन का एकमात्र सहारा कृषि भूमि भी उनसे दूर हो जाने के कारण धनलाल साहू एवं बत्ताबाई साहू ने न्यायालय की शरण ली।न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी अमरवाड़ा हेमकरण धुर्वे द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 0169/बी-121/2026-27 में दिनांक 07/07/2026 को पारित आदेश में वृद्ध माता-पिता के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय दिया गया।

न्यायालय ने न केवल दोनों पुत्रों को माता-पिता के भरण-पोषण हेतु प्रतिमाह ₹1000 की राशि देने के आदेश दिए, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए दिनांक 31/08/2013 का बंटवारा आदेश भी निरस्त कर दिया। इसके साथ ही ग्राम मानेगांव स्थित खसरा नंबर 516/1, 517/2, 609 एवं 613/3 कुल रकबा लगभग 8 एकड़ कृषि भूमि पुनः पिता धनलाल साहू को वापस प्रदान करने का आदेश पारित किया गया।

न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी अमरवाड़ा के इस संवेदनशील निर्णय से समाज में यह संदेश जाएगा कि वृद्ध माता-पिता की सेवा एवं भरण-पोषण प्रत्येक संतान का नैतिक एवं कानूनी दायित्व है। निर्णय के बाद आवेदकगणों ने अपने अधिवक्ता राजेंद्र नेमा एवं न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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