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छिंदवाड़ा: जनजातीय कार्य विभाग में निविदा अनियमितताओं का आरोप, प्रधानमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग

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सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग, छिंदवाड़ा में निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कार्य आवंटित किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को शिकायत भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।शिकायत में विभाग में पदस्थ इंजीनियर दीपक सरयाम पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने निविदा प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी करते हुए और निविदा समिति को गुमराह करते हुए कथित रूप से अपात्र एवं फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले ठेकेदारों को पात्र घोषित कर कार्य आवंटित किए।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे शासन को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ पात्र ठेकेदारों के हित भी प्रभावित हुए हैं।इन निविदाओं का किया गया उल्लेखशिकायत में तीन प्रमुख निविदाओं का उल्लेख किया गया है—निविदा क्रमांक 2025_TAD_400776_1 में आरोप लगाया गया है कि एक ठेकेदार द्वारा कथित रूप से फर्जी विद्युत लाइसेंस एवं शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया, लेकिन शिकायत और दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद उसे कार्य आवंटित कर दिया गया।

निविदा क्रमांक 2026_TAD_477500_1 में आरोप है कि इंजीनियर के दस्तावेजों के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति के दस्तावेज संलग्न किए गए, फिर भी संबंधित ठेकेदार को पात्र घोषित किया गया।

निविदा क्रमांक 465/ई-निविदा/ज.जा.का.वि./29.01.2026 में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एक निर्माण कंपनी को अन्य विभागों द्वारा कथित रूप से ब्लैकलिस्ट या अपात्र घोषित किए जाने के बावजूद जनजातीय कार्य विभाग ने उसे पात्र मानकर निविदा प्रक्रिया में शामिल किया।

ये की गईं प्रमुख मांगें शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि—सभी संबंधित निविदाओं की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।जांच जिला कलेक्टर, छिंदवाड़ा अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी की निगरानी में कराई जाए।यदि जांच में आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।

जांच पूरी होने तक संबंधित निविदाओं एवं कार्यों पर आवश्यक वैधानिक रोक लगाने पर विचार किया जाए।शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि शिकायत के बाद उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ना या नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसलिए उन्होंने अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग या अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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