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मप्र राज्यसभा चुनाव में बड़ा भूचाल: कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द; बीजेपी की निर्विरोध जीत तय, दिल्ली तक मचा बवाल!

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सतपुड़ा एक्सप्रेस भोपाल/दिल्ली: मध्य प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्यसभा चुनाव की स्क्रूटनी (नामांकन पत्रों की जांच) के दौरान कांग्रेस की मुख्य उम्मीदवार और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर (RO) द्वारा रद्द कर दिया गया है। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद मध्य प्रदेश से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।इस फैसले के साथ ही मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला पूरी तरह खत्म हो गया है और बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस के लिए यह एक बहुत बड़ा राजनीतिक और कानूनी झटका माना जा रहा है।

क्यों रद्द हुआ नामांकन?

जानिए पूरा कानूनी पेंच बीजेपी के विधि प्रकोष्ठ और वकीलों ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। बीजेपी का आरोप था कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे (Affidavit) में एक लंबित कानूनी मामले की जानकारी छुपाई है, जो सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग (ECI) की गाइडलाइंस का सीधा उल्लंघन है।

मामले की टाइमलाइन और मुख्य बिंदु:

हैदराबाद का मामला: शिकायत के अनुसार, तेलंगाना (हैदराबाद) की ‘फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट’ अदालत में मीनाक्षी नटराजन और अन्य के खिलाफ एक मुख्य याचिका लंबित है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज है।अदालती नोटिस: अदालत ने सितंबर 2025 में नटराजन को ‘नोटिस टू रेस्पोंडेंट’ (समन) जारी किया था, जिसका जवाब उनके वकीलों ने अक्टूबर 2025 में दाखिल भी किया था।

छुपाने का आरोप:

बीजेपी का तर्क था कि हलफनामे में इस अदालती प्रक्रिया और नोटिस का जिक्र अनिवार्य था, जिसे छुपाया गया। दोनों पक्षों की लंबी दलीलों को सुनने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने शिकायत को सही पाया और नामांकन खारिज कर दिया।

“यह लोकतंत्र की हत्या है” — भड़की कांग्रेस,

दिल्ली में चुनाव आयोग के बाहर धरनानामांकन रद्द होने की खबर मिलते ही कांग्रेस खेमे में भारी आक्रोश है। मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस इसके खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और सड़क से लेकर कोर्ट तक की लड़ाई लड़ी जाएगी।

कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने भी पार्टी को तुरंत सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की सलाह दी है।वहीं, दिल्ली में इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, सचिन पायलट और भूपेश बघेल जैसे दिग्गज नेता चुनाव आयोग (ECI) के दफ्तर पहुंचे। हालांकि, सुरक्षा कारणों और पूर्व अनुमति न होने का हवाला देकर उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया, जिसके बाद नाराज कांग्रेस नेता चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर ही धरने पर बैठ गए।

सचिन पायलट ने मीडिया से कहा:”हमारी उम्मीदवार के खिलाफ कोई एफआईआर (FIR) या चार्जशीट नहीं है। सिर्फ एक सामान्य अदालती नोटिस के आधार पर उस सीट से नामांकन रद्द कर दिया गया, जहां हमारी जीत तय थी। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

“बीजेपी का पलटवार:”

यह कानून की जीत है”दूसरी तरफ, बीजेपी इस फैसले को नियमों और कानून की जीत बता रही है। मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपने घर में मची उथल-पुथल और वकीलों की लापरवाही पर ध्यान देना चाहिए। बीजेपी नेताओं का कहना है कि नियमों के मुताबिक हर उम्मीदवार को अपने सभी मामलों की जानकारी पारदर्शी तरीके से देनी होती है।सतपुड़ा एक्सप्रेस का विश्लेषण: अब आगे क्या?मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की तीनों खाली हो रही राज्यसभा सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित हो गई है। कांग्रेस के पास संख्या बल होने के बावजूद तकनीकी चूक या कानूनी लड़ाई में पिछड़ने के कारण यह सीट हाथ से निकलती दिख रही है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के रुख पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस को इस मामले में कोई तात्कालिक राहत मिल पाती है या नहीं।- सतपुड़ा एक्सप्रेस ब्यूरो रिपोर्ट।

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