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ई-टोकन के नाम पर किसानों का हक कौन खा रहा?

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ई-टोकन के नाम पर किसानों का हक कौन खा रहा?जरूरत से ज्यादा खाद बुकिंग, पीओएस में पूरी निकासी और कालाबाजारी की आशंका

किसानों को सलाह: आवश्यकता अनुसार ही कराएं ई-टोकन में खाद बुकिंग


किसान हित में विशेष सूचना

सतपुड़ा एक्सप्रेस अमरवाड़ा:{रिपोर्ट:आलोक सूर्यवंशी}खरीफ सीजन में उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ किसानों को ई-टोकन बुकिंग के दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कई किसान बिना पूरी जानकारी के अपनी वास्तविक जरूरत से अधिक मात्रा में खाद बुक करा रहे हैं, जिससे बाद में उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कृषि जानकारों के अनुसार यदि किसी किसान को केवल 2 बोरी डीएपी/NPK की आवश्यकता है, लेकिन ई-टोकन में 10 बोरी खाद बुक करने का विकल्प दिखाई दे रहा है, तो किसान को केवल अपनी जरूरत के अनुसार 2 बोरी ही बुक करानी चाहिए। शेष 8 बोरी उर्वरक उसकी पात्रता में सुरक्षित बनी रहती है और आवश्यकता पड़ने पर बाद में भी बुक कराई जा सकती है।किसानों का आरोप है कि जानकारी के अभाव मे कई मामलों में ई-टोकन में अधिक मात्रा बुक होने के बाद पीओएस मशीन से पूरी मात्रा की निकासी दर्ज कर दी जाती है, जबकि किसान वास्तव में कम खाद की जरूरत होती है और प्राप्त करता है। ऐसी स्थिति में किसान के खाते से पूरी खाद कम हो जाती है और बची हुई खाद के दुरुपयोग या कालाबाजारी की आशंका पैदा होती है।

: ऐसे समझिए किसान का नुकसान कैसे हो सकता है

मान लीजिए किसी किसान को अपनी फसल के लिए केवल 2 बोरी डीएपी/NPK खाद की आवश्यकता है। लेकिन ई-टोकन बुकिंग के दौरान उसके नाम से 10 बोरी डीएपी/NPK की पात्रता है और 10 बोरी बुक कर दी जाती है।किसान दुकान से केवल 2 बोरी खाद लेकर घर चला जाता है, क्योंकि उसे उतनी ही जरूरत होती है। लेकिन यदि पीओएस मशीन में किसान के नाम से पूरी 10 बोरी खाद की निकासी दर्ज कर दी जाती है, तो रिकॉर्ड में यह दिखेगा कि किसान ने 10 बोरी खाद प्राप्त कर ली है।ऐसी स्थिति में किसान के खाते से पूरी 10 बोरी खाद कम हो जाएगी, जबकि उसे वास्तव में केवल 2 बोरी ही मिली है। बाद में जब किसान को अतिरिक्त खाद की जरूरत पड़ेगी, तब उसके खाते में पात्रता शेष नहीं बचेगी।

इसलिए ई-टोकन बुकिंग करते समय उतनी ही खाद बुक करानी चाहिए, जितनी वास्तव में आवश्यकता हो। यदि 2 बोरी की जरूरत है तो 2 बोरी ही बुक कराएं। शेष पात्रता किसान के खाते में सुरक्षित रहती है और आवश्यकता पड़ने पर बाद में भी खाद प्राप्त की जा सकती है।

किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात:
ई-टोकन में दर्ज मात्रा, पीओएस मशीन की रसीद और प्राप्त खाद की मात्रा का मिलान अवश्य करें। यदि तीनों में अंतर है तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को शिकायत करें

“जरूरत जितनी, बुकिंग उतनी” — यही किसान के हित और उर्वरक वितरण में पारदर्शिता का सबसे अच्छा तरीका है।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
जितनी आवश्यकता हो, उतनी ही खाद ई-टोकन में बुक कराएं।

  • पीओएस मशीन से निकली रसीद अवश्य लें और उसकी जांच करें।
  • रसीद में दर्ज खाद की मात्रा का मिलान प्राप्त खाद से करें।
  • बिना खाद प्राप्त किए किसी भी दस्तावेज या रसीद पर सहमति न दें।
  • किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर तत्काल कृषि विभाग या संबंधित अधिकारियों को शिकायत करें।

खाद विक्रेताओं की भूमिका पर भी उठे सवाल

खरीफ सीजन के बीच उर्वरक वितरण की ई-टोकन व्यवस्था सवालों के घेरे में है। क्षेत्र से मिल रही शिकायतों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कई किसानों के नाम पर उनकी आवश्यकता से अधिक मात्रा में डीएपी, एनपीके तथा अन्य उर्वरकों की बुकिंग की जा रही है। इसके चलते किसानों के खाते से पूरी खाद कम होने और अतिरिक्त खाद के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ खाद विक्रेताओं द्वारा स्वयं अपनी दुकानों पर किसानों के ई-टोकन बुक किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कई किसानों को यह जानकारी तक नहीं होती कि उनके नाम से कितनी मात्रा में खाद बुक हुई है और पीओएस मशीन से कितनी मात्रा दर्ज की गई है।

सूत्रों के अनुसार गांवों के भोले-भाले और तकनीकी जानकारी से दूर किसान ऑनलाइन प्रक्रिया को पूरी तरह नहीं समझ पाते। इसका फायदा उठाकर कुछ दलाल ई-टोकन बुकिंग का काम अपने हाथ में ले लेते हैं। कई मामलों में किसानों को यह भी जानकारी नहीं होती कि उनके नाम से कितनी मात्रा में डीएपी, एनपीके या अन्य उर्वरक बुक किए गए हैं।इसका फायदा उठाकर कुछ स्थानों पर किसानों के नाम से आवश्यकता से अधिक खाद बुक किए जाने की चर्चा है कि खाद उपलब्ध कराने के नाम पर कुछ बिचौलिये किसानों से अतिरिक्त राशि भी वसूलते हैं। वहीं, आवश्यकता से अधिक खाद बुक होने और पीओएस मशीन में पूरी मात्रा दर्ज होने पर किसानों के हिस्से की खाद समाप्त हो जाती है, जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।खरीफ सीजन में उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ ही ई-टोकन व्यवस्था में दलालों की सक्रियता को लेकर किसानों में चिंता बढ़ रही है।

ई-टोकन व्यवस्था में तकनीकी खामियां

ई-टोकन व्यवस्था में तकनीकी खामियां भी किसानों की परेशानी बढ़ा रही हैं। कभी सर्वर समस्या तो कभी भूमि रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने से किसान खाद बुकिंग से वंचित रह जाते हैं। वहीं कई किसानों ने यह भी शिकायत की है कि दिनभर स्टॉक उपलब्ध नहीं दिखाई देता, लेकिन रात के समय अचानक स्टॉक खुलकर कुछ ही समय में बुक हो जाता है।इसके अलावा नकद बिक्री केंद्रों पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों के अनुसार कई बार दिनभर स्टॉक “शून्य” (Zero Stock) दिखाई देता है, लेकिन रात या आधी रात के समय अचानक स्टॉक उपलब्ध होकर कुछ ही मिनटों में पूरा बुक हो जाता है। इससे दूर-दराज के गांवों के किसानों को खाद बुकिंग का अवसर नहीं मिल पाता और उन्हें बार-बार केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

किसानों की अतिरिक्त मांगें

सर्वर संबंधी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।

जमीन रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों को शीघ्र सुधारा जाए।

नकद बिक्री केंद्रों के स्टॉक की ऑनलाइन निगरानी हो।

स्टॉक उपलब्ध होते ही किसानों को एसएमएस सूचना दी जाए।

रात में होने वाली संदिग्ध बुकिंग की जांच कराई जाए।

ई-टोकन व्यवस्था को पूर्णतः सरल और पारदर्शी बनाया जाए।


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