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जनकवि मुकुट बिहारी ‘सरोज’ की जन्मशती पर छिंदवाड़ा में हुआ भव्य साहित्यिक आयोजन

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सतपुड़ा एक्सप्रेस छिंदवाड़ा/16मार्च 2026 मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रांतीय मुख्यालय, भोपाल एवं जिला इकाई, छिंदवाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में गत दिवस रायमेंस कैफ़े छिंदवाड़ा में प्रख्यात जनकवि मुकुट बिहारी ‘सरोज’ के जन्मशती समारोह का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। हिंदी साहित्य सम्मेलन राज्य इकाई के पलाश सुरजन ,मालिनी गौतम आदि के मार्गदर्शन और छिन्दवाड़ा म. प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन इकाई अध्यक्ष ओमप्रकाश नयन,सचिव शेफाली शर्मा ,कार्यकारी अध्यक्ष रोहित रूसिया, कार्यकारिणी सदस्य दिनेश भट्ट और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हेमेंद्र राय के निर्देशन तथा सुश्री मान्यता सरोज के सानिध्य में हुए इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश के प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि और आलोचकों ने शिरकत की।कार्यक्रम का कुशल संचालन शेफाली शर्मा और आभार प्रदर्शन दिनेश भट्ट ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं प्रख्यात कवियित्री व अनुवादक सुश्री इंदिरा किसलय ने कहा कि जनकवि मुकुटबिहारी सरोज निष्कपट ईमानदारी के बादशाह कवि हैं. कार्यक्रम अध्यक्ष एवं हिंदी -बुंदेली के सुविख्यात कवि व गजलकार महेश कटारे “सुगम ” ने कहा कि मैंने मुकुटबिहारी सरोज को पढते हुये ही अपना रचना कर्म प्रारंभ किया. विशिष्ट अतिथि एवं राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. लक्ष्मीचंद ने कहा कि मुकुट बिहारी सरोज के साहित्य पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध हुये हैं तथा अभी भी उनके साहित्य पर शोध की अपार संभावनायें हैं.

कार्यक्रम में बीज वक्तव्य देते हुये महिला कवियित्री व आलोचक डा. मनीषा जैन ने कहा कि जनकवि मुकुट बिहारी सरोज की कविता मात्र कविता नहीं है, बल्कि जीवन का आसव है जिसमें मानव मन की पीडा है, आक्रोश है और कशमकश है. जनकवि मुकुट बिहारी सरोज की पुत्री सुश्री मान्यता सरोज ने उनके जीवन से जुडी यादों को साझा करते हुये कहा कि वे एक डेमोक्रेटिक पिता थे जिन्होंने अपने बच्चों पर कभी भी पिता होने का भार नहीं थोपा. प. प्रख्यात गीतकार डा. मालिनी गौतम ने विषय प्रवर्तन करते हुये जनकवि मुकुट बिहारी सरोज के साहित्यिक अवदान पर विस्तार से चर्चा की और उन पर केन्द्रित पुस्तिका “यादों में सरोज” विशेषांक के संपादन से जुडी प्रक्रिया को साझा किया. वरिष्ठ साहित्यकार हेमेंद्र कुमार राय स्वागत वक्तव्य देते हुये कहा कि मुकुट बिहारी सरोज अपनी रचनाओं में देश के शोषित किसानों, मजदूरों आदि को शोषण के विरुद्ध जागृत और आगाह करने के साथ ही उनके संघर्ष को संबल देते हैं.

कार्यक्रम के व्दितीय सत्र में सर्वश्री महेश कटारे सुगम, सुश्री इंदिरा किसलय, डा. मालिनी गौतम, अभिषेक वर्मा, लक्ष्मण प्रसाद डहेरिया, ओमप्रकाश नयन, हेमेंद्र कुमार राय, विनय प्रकाश जैन, सुश्री अंजुमन आरजू, सुश्री श्रुति कुशवाहा, महेश दुबे, प्रभात कटारे, अवधेश तिवारी, आशीष मोहन, राकेश राज आदि ने रचना पाठ किया. कार्यक्रम के विशेष आकर्षण में जहाँ नन्हीं बालिका आन्या ठाकुर ने जनकवि मुकुट बिहारी सरोज के गीतों का ओजस्वी स्वर में पाठ किया और गीतकार व चित्रकार रोहित रूसिया ने सरोज जी के गीत को सुमधुर स्वर में प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया, वहीं युवा गायक ओशिन धारे ने सरोज जी के गीतों की संगीतमय प्रस्तुति दी.

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों व्दारा जनकवि मुकुट बिहारी सरोज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित करने और पुष्पमाला व पुष्पांजलि अर्पित करने से हुआ. कार्यक्रम में “यादों में सरोज “शीर्षक से जनकवि मुकुट बिहारी सरोज जन्मशती विशेषांक का भी अतिथियों ने विमोचन किया. छिंदवाडा के साहित्यिक जगत में संपन्न इस अभूतपूर्व कार्यक्रम में वरिष्ठ चित्रकार ध्रुव के सरोज जी के कवितांशों पर केन्द्रित कविता पोस्टरों की भी धूम रही.अतिथिगण व साहित्यकारगण स्नेह भोज में भी शामिल हुये. इस अवसर पर सर्वश्री गोवर्धन यादव, रणजीत सिंह परिहार, डा. उर्मिला खरपुसे, डा. अमर सिंह, अशोक जैन, शैलेन्द्र तिवारी, मोहिता जगदेव, हेमंत झा, राजकुमार चौहान, पद्मा जैन, दीप विश्वकर्मा, शरद मिश्रा, अंकुर वाल्मीकि, रामलाल सराठे रश्मि, राजेन्द्र यादव, अनुराग श्रीवास्तव, अभिनव श्रीवास्तव, संजय औरंगाबादकर आदि शताधिक श्रोतागण उपस्थित थे.

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